<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090</id><updated>2011-12-30T08:20:26.597-08:00</updated><title type='text'>khushi</title><subtitle type='html'>khushi se sab pe lutate hain piyaar ki daulat.
Gareeb log bhi kitne ameer hote hai</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>37</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-7541587715533432542</id><published>2011-11-25T07:31:00.001-08:00</published><updated>2011-11-25T08:10:51.873-08:00</updated><title type='text'>मीडिया में सछ्चाई से अनदेखी का बढ़ता रुझान</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जांच एजेंसियों और मीडयाके &amp;nbsp;तारिक कर पर न्याय पसंद लोगों द्वारा आपत्तियाँ कोई नहीं बात नहीं है. बारहाअपने कर्तव्यों को पूरा &amp;nbsp;करने में जानिब&amp;nbsp; दाराना व्यवहार करने परमीडयाको &amp;nbsp;मुंह&amp;nbsp; की खानी पड़ी है. राजनीति &amp;nbsp;तबका के&amp;nbsp; एक वर्ग के साथ &amp;nbsp;बुद्धिमान&amp;nbsp;ने भी इस तरह की तुच्छ हरकत से बाज आने की मीडिया को नसीहत की है, मगर सनसनी फीलाने और&amp;nbsp; जनता का ध्यान केवल अपनी ओर आकर्षित करानेकी होड़ में वह अपने कर्तव्यों को भूल जाते हैं. तिल को तार बनाकर पेश करने में माहिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े लोगों &amp;nbsp;में &amp;nbsp;यह रुझान खतरनाक रूप इख्तेयार करता&amp;nbsp; जा रहा है कि वह सच्चाई का सामना नहीं करते बल्कि जब कभी कोई महत्वपूर्ण घटना उनकी नज़रों के सामने होती&amp;nbsp; है तो बड़ी चालाकी से अपनी आँख&amp;nbsp;मूनद लीते है - क्योंकि वह यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि ईमानदारी पुर उन्हें अपने मालिकों &amp;nbsp;से पुरस्कार नहींमलने वाला है तो फिर क्यों न वह काम किया जाए जiस &amp;nbsp;पर उसकी वाह वाही भी हो और इम्नाम भी&amp;nbsp; मिले, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि उसकी पेशकश और समाचार सच्चाई पर न जाने कितने लोगों की निगाहें केंद्रित होती हैं और यह करें बैठे हैं कि शायद उनकी रिपोर्ट पर्याप्त परिणाम बुर आगमन हो. मज़लूम और परेशान हाल लोगों का कुछ भला हो जाए और ऐसा चमतकारहो कि राष्ट्र, समाज और देश की तकदीर बदल जाए. &amp;nbsp;कभी ऐसा होता भी है कि वर्षों से दरबदर की ठोकरें खाते आ रहे इंसान को मीडिया के माध्यम से मज़बो्t सहारा मिला है और उनकी राह में आड़े संकट दूर हुई हैं. हम इस तथ्य से भी इनकार नहीं कर सकते कि मीडिया के विकास ने भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार की समाप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है . लेकिन इसके माध्यम से दर आने वाली अश्लीलता और बे हियाई से भी इंकार नहीं किया जा सकता.&lt;br /&gt;&amp;nbsp;यह एक अलग विषय हे -हम यहाँ&amp;nbsp;मीडयाके इन &amp;nbsp; व्यवहार का उल्लेख रहे हीं जस की वजह से देश के बीस करोड़ मुसलमानों को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मुसलमानों को जहां एक अनदेखी की जा रहा है वहीं दूसरी ओर ानहीं बदनाम और हिंसा पसंद साबित करने की लगातार को शशें जारी है. यही वजह है कि जब भी कोई आकस्मिक स्थित पेश आता है तो मीडिया की सबसे पहले यही कोशिश होती है कि उसका रुख किसी तरह मुसलमानों की ओर मोड़ दिया जाए. पिछले महीने जब दिल्ली हाई कोर्ट में बम विस्फोट हुआ तो एक टीवी का &amp;nbsp;पत्रकार&amp;nbsp; बड़ी शरमी से खुफिया एजेंसी के अधिकारियों से पूछ रहा था कि कहीं इसमें 'इंडियन मुजाहिदीन' का तो हाथ नहीं है? यानी मीडिया प्रसारण करने के बजाय औपचारिक किसी मामले में पक्ष बन जाता है. जैसा कि आना हजारे के अनशन के अवसर पर देखने को मिला था. राम लीला मैदान में आना के अनशन के दौरान प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के न्यूनतम से लेकर उच्च पत्रकार, रिपोर्टर और एंकर बराजमान थे. राम लीला मैदान के किस बाथरूम में गंदगी है, कहाँ पानी की कमी है, दवाएं और भोजन आदि में समस्या हो रही है, विरोध कारों कौन सी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है. आना की टोपी, बनियान, शर्ट, लड़कियों के शरीर पर लेख सलोगन आदि को खूब दीखाया गया. ऐसी चीजें वह ब्रेकिंग समाचार में भी देख रहे थे. देश में और क्या होर रहा है इससे उन्हें कोई सर्व कार नहीं. इसलिए हुआ भी यही आना के अनशन ने कई मुद्दों को दबा दिया..&lt;br /&gt;बहुत अच्छी बात यह है कि सरकार और देश का प्रतिष्ठित वर्ग इस बात को अच्छी तरह समझने लगा है कि &amp;nbsp;मुसलमानों के साथ अन्याय हो रहा है. बम विस्फोट और किसी भी आतंकवादी घटना के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां ​​पहले मुसलमानों को अपना निशाना बना जाती हैं. बिना किसी सबूत के दिन के उजाले और रात के ानधीरों में उनके घरों में छापे दी जाती है और उन्हें तरह तरह से परेशान किया जाता है. पहले गृहमंत्री पी चिदंबरम ने इस ओर तो जह देते हो ए पुलिस और जांच एजेंसियों को स्पष्ट किया कि एजेंसियां ​​जांच का रुख एक समुदाय की ओर न मोड़ें. इसलिए कि देश के अंदर कई बम धमाकों में भगवा आतंकवाद का भी पता मिला. यहाँ इस तथ्य के बारे में भी ज़रूरी है कि इस दिशा सबसे पहले अगर किसी अधिकारी ने ध्यान दिया और व्यापार को बदला जो पुलिस अधिकारी और जांच एजेंसियों का था तो उसका श्रेय महाराष्ट्र एटीएस प्रमुख शहीद हेमंत करकरे के सिर जाता है. भगवा आतंकवाद का जिस जवां मुर्दी उन्होंने खुलासा कया आज़ाद&amp;nbsp;भारतीय इतिहास में उसकी मिसाल नहीं मिलती. आज जो देश की विभिन्न जेलों में साध्वी परीगया सिंह, कर्नल पुरोहित और स्वामी ासीमाननदसमयत दर्जनों हिंदू अतिवादी बंद हैं यह सब स्वर्गीय करकरे की देन हैं. बहुत कम अवधि में ईमानदारी से अपने कर्तव्य पद को निभाते हुए उन्होंने भगवा खेमे में हलचल मचा दी, यही वजह है कि उन्हें अपने जीवन से भी हाथ धोना पड़ा.&lt;br /&gt;विचार करने की बात यह है कि उनसे पहले केवल महाराष्ट्र में न जाने कितने निर्दोष मुस्लिम युवा बम धमाकों की वजह से जेल की सलाखों में भेजे जा चुके थे, और यह सिलसिला हनोज़ जारी था- देश के मूल समस्याओं में ग़रीबी, बेरोज़गारी, आवास की कमी और चिकित्सा सुविधाएं अप्रसार उपलब्धता है लेकिन मीडिया ऐसे मामलों को उजागर करता है जिससे जनता कोई संबंध नहीं होता है. मसलन लेकमे फैशन वीक के कवरेज के लिए 512 / स्वीकृत पत्रकार मौजूद थे. अनशन के दौरान पूरी मीडिया सिमट कर राम लीला मैदान में बराजमान थी .24 घंटे केवल एक ही खबर प्रसारित की जाती रही. क्षेत्रों में कुछ हजार लोगों को इस तरह पेश किया गया जैसे पूरा देश अन्ना के &amp;nbsp;साथ हो. मीडिया का एक पहलू यह था जो राम लीला मैदान में आना के अनशन के अवसर पर देखने को मिला अब उसके दूसरे पहलू पर विचार कर ते है -&lt;br /&gt;&amp;nbsp;12 अक्टूबर को अलीगढ़ मुस्लिम उनिवार&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-LcKOsGqacCc/Ts-9s9Xm3lI/AAAAAAAAACw/9vlkLOjy-vg/s1600/media.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="240" src="http://2.bp.blogspot.com/-LcKOsGqacCc/Ts-9s9Xm3lI/AAAAAAAAACw/9vlkLOjy-vg/s320/media.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;सिटी की किशनगंज शाखा के जल्द गठन में टालमटोल का प्रदर्शन करने पर बिहार की नीतीश सरकार के खिलाफ प्रसिद्ध आलम दीन वर्कन संसद मौलाना &amp;nbsp;असरारुल हक &amp;nbsp; कासमी के नेतृत्व में लगभग दो लाख से अधिक बिहार, बंगाल और देश अन्य राज्यों की जनता ने भारी दस्त विरोध किया. बताया जाता है कि एएमयू केन्द्र नहीं तो सरकार नहीं, नीतीश कुमार ज़मीन दो 'जैसे निरों से पूरा क्षेत्र गूंज रहा था. विरोध में जनसमूह से अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार का पूरा दृश्य बदला हो ाथा, राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात जाम और रेलवे विभाग पूरी तरह ठप था. गौरतलब बात यह है कि बिहार में अल्पसंख्यकों की ओर से किए जाने वाला अपनी प्रकार का यह पहला प्रदर्शन था जिसमें पुरुष और महिलाओं, बूढ़े और बच्चों का उत्साह दीदनी था. सुबह के सात बजे से रात के ग्यारह बजे तक इंसानों का ठा ठें मारता समुद्र रोई धासह के ऐतिहासिक मैदा न में था. मगर अफ़सोस प्रतिशत अफसोस कि इतने बड़े आंदोलन और बहुत ही संवेदनशील मो ज़ोि को राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने अनदेखी कर दिया. अगर मीडिया ने शुद्ध सार्वजनिक हित के बारे में इस विरोध को महत्व दिया होती तो मज़लूम जनता का भी कुछ भला होता. लेकिन मीडिया के इस दोहरे मानदंड कयानाम दिया जाए कि एक ओर तो आना लिए हर जगह पलकें बिछाए रहता है और दूसरी ओर अल्पसंख्यकों विशेषकर मुसलमानों के सबसे समस्याओं से भी तरह अनदेखी की जाती है.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-7541587715533432542?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/7541587715533432542/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2011/11/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7541587715533432542'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7541587715533432542'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2011/11/blog-post.html' title='मीडिया में सछ्चाई से अनदेखी का बढ़ता रुझान'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-LcKOsGqacCc/Ts-9s9Xm3lI/AAAAAAAAACw/9vlkLOjy-vg/s72-c/media.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-5872081884766089541</id><published>2011-10-02T07:45:00.000-07:00</published><updated>2011-10-02T08:04:26.126-07:00</updated><title type='text'>देश के अधिकांश बम धमाकों में भगवा आतंकवाद ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/--cEaokEQnrA/Toh9B5Li0gI/AAAAAAAAACs/lZMg6K1eFkA/s1600/hindu.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5658910403273609730" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; CURSOR: hand; HEIGHT: 214px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/--cEaokEQnrA/Toh9B5Li0gI/AAAAAAAAACs/lZMg6K1eFkA/s320/hindu.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;पिछले &lt;span class=""&gt;हफ्ते &lt;span class=""&gt;बटला &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;हाउस iन्कोन्टर की तीसरी बरसी के मो कि पर यकलख्त (एकदम) मुझे ऐसा महसूस हुआ कि 18 / सितम्बर 2008 / को जामिया नगर में पुलिस उत्पीड़न का शिकार बने आतिफ और साजिद का लहू बोलने लगा है. क्योंकि उस दिन एक तरफ जहां विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक रहनमा&lt;span class=""&gt;ऑ,&lt;/span&gt; छात्रों समुदाय की ओर से विरोध और धरने का आयोजन, कर करके सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा जांच की मांग को दोहराते न्याय की &lt;span class=""&gt;गोहार &lt;/span&gt;लगाई जा रही थी वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र पुलिस हिंदू आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए राज्य सरकार से सिफारिश कर रही थी. महाराष्ट्र पुलिस ने सरकार से भगवा संगठन सनातन संस्था और अभिनव भारत को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन की सूची में शामिल किए जाने की पुरजोर सिफारिश की तो केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार से इन संगठनों गतिविधियों की अधिक जानकारी मांगी। यह सब अचानक नहीं हो गया, इसके लिए वर्षों से को शशें हो रही थी, सरकार को लगातार जगाया जा रहा था, पुलिस और प्रशासन को भगवा आतंकवादियों की ओर गंभीरता से ध्यान आकर्षित करने आवेदन की जाती रही हैं यही वजह है कि देर से ही सही सरकार और प्रशासन ने अपनी सोच बदली , जांचकर्ताओं ने अपना रुख बदला. अब जो हकीकतें सामने रही हैं वह न केवल चौंका देने वाली हैं बल्कि पूरे देश को हलाकर रख दिया है. दरअसल यह इन निर्दोषों की और शहीदों का लहू ही जो अब बू लने लगा है. आतिफ और साजिद को दिल्ली में हुए बम धमाकों के आरोप में पोलिसे के शिकार बने थे. गौर तलब है कि भगवा आतंकवाद गिर दी का दायरा जितना माना जा रहा है उससे कहीं अधिक व्यापक है. जांच एजेंसियों को एक दो नहीं बल्कि देश में होने वाले 16 / बम धमाकों में भगवा आतंकवाद के शामिल होने का संदेह है, लेकिन अफसोस की बात यह है कि केवल कुछ में ही उनके रोल की जांच की जा रही है. डिकन हीरालड एक खबर के अनुसार पिछले दनोंराज्यी पुलिस प्रमुखों की बैठक में खुफिया ब्यूरो (आईबी) के एक स्पेशल निर्देशक बताया कि देश में होने वाले कम से कम 16 / बम धमाकों मेंया तो भगवा आतंकवाद की भूमिका की जांच हो रही है या बम धमाकों 'मैं उनके शामिल होने का संदेह है. इस खुलासे से स्पष्ट होता है कि भगवा आतंकवाद का नेटवर्क रोज़ बरोज़ फैलती जा रहा है जूमलक की अखंडता के लिए भारी दस्त चुनौती है. आज़ादी के बाद से लगातार जुल्मो बलात्कार का शिकार बन रहे मुसलमानों के लिए यह कोई मामूली खुलासा नहीं है .64 / सालों से न्याय और अधिकार की लड़ाई लड़ रहे मुस्लिम अल्पसंख्यक को इस पर बहुत खुश होने की जरूरत नहीं है कि यह तो अभी ागाम है. आगे आगे देखिए होता है क्या. अगर पुलिस की सिफारिशों पर महाराष्ट्र और केंद्र सरकार ध्यान ध्यान देती है तो यह भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय साबित होगा. हिन्दू आतंकवादियों द्वारा अंजाम दिए गए आतंकवादी घटनाओं में देश की विभिन्न जेलों में बंद ोबनद की सावबतें झेल रहे हजारों निर्दोषों को रिहाई का पर वानह मिल जाएगा. उनकी पर खार मार्ग आसान हो जाएगा और जेलों से रिहा होकर अपनी जीवन की शुरुआत कर सकते हैं. फोकस बात यह है कहानी खुलासे के बाद देश में शांति और सुरक्षा के लिए हर संभव कदम का राग अलाप वाली सरकारें इस मसले पर कितनी गंभीर हैं. अपने नागरिकों की सुरक्षा की उसे वास्तव में चिंता है या महज दीखावा. देश के परेशान हाल मुसलमानों के समस्याओं से भी उन्हें कितनी दिलचस्पी है यह सब कुछ मालूम हो जाएगा. चूंकि देश प्रिय लिए आतंकवाद जितना बड़ी चुनौती है उससे कहीं ज़्यादा यह मुसलमानों के लिए ना सुअर! क्योंकि हर घटना का आरोप मुसलमानों के सिर मंडख दिया जाता है. अगर भगवा आतंकवाद पर शिकंजा कसा जाता है तो मुसलमानों को इस नासूर से छुटकारा प्राप्त होने की उम्मीद है. इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों को पुलिस की सिफारिश पर बहुत गंभीरता से बिना ताखीरकेतोजह देने की जरूरत है. इसकी वजह यह है कि सनातन संस्था और अभिनव भारत वह खतरनाक भगवा पार्टी है जिसने पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में पे दरपे बम विस्फोट किए हैं, पुलिस के पास पुख्ता सबूत और साक्ष्य मौजूद. यही वजह है कि पुलिस इन दोनों दलों पर प्रतिबंध लगाए जाने के मामले में ाज़हद गंभीर है. महाराष्ट्र पुलिस ने आतंकवाद विरोधी क़ानून और अवैध सर गर्मियाँ (परीवेनशन एक्ट) के तहत हिंदू संगठन, सनातन संस्था और भैण भारत को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने की महारशटर सरकार से सिफारिश की है. सुना तन संस्था का नाम 2009 / के गोवा बम विस्फोट में सामने आया था जबकि 2006 के मालीगाों बम विस्फोट में अभिनव भारत के सदस्य शामिल पा गए थे. इस सिलसिले में एटीएस और सीबीआई ने अभिनव भारत के सदस्यों लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रो हत, अजय राहीर्कर , रमेश उपाध्याय और समीर कुलकर्णी सहित अन्य कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इसी तरह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एन आई ए) ने गोवा बम विस्फोट में सनातन संस्था के 11 / सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. उल्लेखनीय है कि मालीगाों बम विस्फोट में गिरफ्तार सालों से कीदो बंद की सावबतें बुर दाशत कर रहे 9 / मुस्लिम आरोपियों कोकोमे जांच एजेंसी निर्दोष करार दे चुकी है. एन आए इस बात को स्वीकार कर लिया है कि मालीगाों बम धमाकों में एटीएस ने जिन मुस्लिम नौजवानों को गिरफ़्तार किया था वह सब निर्दोष हैं. इस तथ्य के मद्देनजर को मी जांच एजेंसी ने मलआभन अनुरोध जमानत बहिष्कार न करने का फैसला किया है. मालीगाों के बे कदरों की रिहाई की संभावना पहली बार रोशन हुए थेजब हैदर बसी मक्का मसजदबम धमाकों के आरोप में गिरफ्तार भगवा आतंकवादी स्वामी असीम ननदने अपने अपराध को स्वीकार करते हुए बताया था कि मक्का मस्जिद, अजमेर शरीफ और मालीगाों के धमाकों के अलावा समझौता एक्सप्रेस विस्फोट भगवा आतंकवाद कारस्तानी थे. संसद के मौजूदा मानसून सत्र में एक सवाल के जवाब मेंोज़ीर राज्य कृपया प्रवेश जितीनदर सिंह ने बताया कि बम धमाकों की जांच जारी हींलिकन सनातन संस्था और अभिनव भारत के संबंध में जो जानकारी प्राप्त हुईं हैं के मद कृरमहाराशटर पौ लैस ने राज्य सरकार से इन संगठनोंकी सूची में शामिल करने की सिफारिश की है. संसद में यह सवाल इस बारे में उठाया गया था कि इन संगठनों के बम धमाकों में शामिल होने के बाद सरकार ने उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की है और यह कि क्या इन संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा उस पर जितीनदर सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि मालीगाों, समझौता एक्सप्रेस विस्फोट, मक्का मस्जिद और अजमेर दरगाह बम धमाकों में अभी तक किसी संगठन का नाम अंतिम रूप से सामने नहीं आया है, लेकिन इन मामलों में गिरफ्तार आरोपियों स्वामी असीम नन्द, देवेंद्र गुप्ता और लो कैश शर्मा के बारे में जा नकार मिली है कि ये लोग पहले संघ की गतिविधियों में लिप्त रहे हैं. अगर सरकार, पुलिस और जांच कारसनजीदगी और निष्पक्ष अपने दायित्व को अंजाम दें तो बहुत जल्दी यह बात सामने आ जाएगा कि देश की शांति और सुकून को भंग करने में संघ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. सिंह ने जब से इसराइल से दोस्ती बढ़ाई है और उसके प्रदर्शन और कदम पर चलना शुरू किया है देश में शुरू दंगे की घटनाओं की गई है, ंरतें जुड़े हैं. इसलिए समय आ गया है कि इन घटनाओं की गहराई से ईमानदार जांच की जाए ताकि संघ द्वारा साइट विकासशील होने वाले आतंकवादी घटनाओं पर कद गन लगे. वैकल्पिक दीगरभगवा आतंकवाद का दायरा ज्यादा व्यापक होता जाएगा. (ये आर्टिकल आलमी सहारा उर्दू ८थ ओक्ट में चाप है)&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-5872081884766089541?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/5872081884766089541/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2011/10/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/5872081884766089541'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/5872081884766089541'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2011/10/blog-post.html' title='देश के अधिकांश बम धमाकों में भगवा आतंकवाद ?'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/--cEaokEQnrA/Toh9B5Li0gI/AAAAAAAAACs/lZMg6K1eFkA/s72-c/hindu.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-8411127935340632696</id><published>2011-05-28T07:45:00.000-07:00</published><updated>2011-05-28T07:48:28.035-07:00</updated><title type='text'>तबलीगी जमात का नाम आतंकवादियों से जोड़ना साजिश का हिस्सा</title><content type='html'>&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-8411127935340632696?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/8411127935340632696/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2011/05/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/8411127935340632696'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/8411127935340632696'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2011/05/blog-post.html' title='तबलीगी जमात का नाम आतंकवादियों से जोड़ना साजिश का हिस्सा'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-5946186730695245240</id><published>2010-12-28T06:57:00.000-08:00</published><updated>2010-12-28T07:18:47.079-08:00</updated><title type='text'>नया साल मुबारक हो</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/TRn_qjwwQFI/AAAAAAAAACc/v4jvomVwsco/s1600/dua%3D1.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5555752721957535826" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 213px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/TRn_qjwwQFI/AAAAAAAAACc/v4jvomVwsco/s320/dua%253D1.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ccccff;"&gt;&lt;span class=""&gt;आये &lt;/span&gt;हम सब मिलकर दिल से ये दुआ करें की हमारी ज़िन्दगी और मुल्क में २०१० जैसा घोटालों से भरा वर्ष फिर कभी &lt;span class=""&gt;ना &lt;/span&gt;आए .गरीबों के पेट पर लात &lt;span class=""&gt;माअरk&lt;/span&gt;आर सियासत की रोटी चमकाने वाले घोटाले बाज़ नेताओं से खुदा हमें और हमारे मुल्क को महफूज़ रख्खे ।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ccccff;"&gt;न्यू वर्ष में ज़ुल्म और ज़ालिम के खिलाफ आवाज़ बल्नद करें ,गरीब अमीर सभी को इंसाफ मिले ,अपने आस पास के माहौल को बेहतर रखें .अपने मुल्क की यकजहती और भाई चारा की रवायत का एहतराम करे .मुल्क के अमन को नुकसान पहुँचाने वालों की खिलाफ मिलकर लड़ाई &lt;span class=""&gt;लड़ें.&lt;/span&gt;कोई ऐसा &lt;span class=""&gt;काम &lt;/span&gt;हरगिज़ ना अंजाम दें जिस्स्से हमें हजीमत और शर्मिंदगी हो .साफ़ सुथरा समाज बनाने के लिए कोशिश जरी रखे .देश के लिए ऐसा कोई काम कर जाए &lt;span class=""&gt;जिस्किवाजा &lt;/span&gt;से खंडन और मुल्क का नाम रौशन हो .दंगा फसाद फैला कर देश के अमनो &lt;span class=""&gt;अमान &lt;/span&gt;को बिगड़ने वालो पर नज़र रख्खे तभी हमरा मुल्क तार्राकी करसकता है ।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ccccff;"&gt;इस बात भी ख्याल रख्खे की हमारी ज़ात से किसी को तकलीफ ना पहुंचे .खुश रहें ,दूसरों को खुश रख्खें और हर तरफ खुशयां फैलाए।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ccccff;"&gt;फूलों की तरह हंस के गुज़रती रहे hayat &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ccccff;"&gt;गम आप के करीब ना आए खुदा करे .(आमीन)&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-5946186730695245240?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/5946186730695245240/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/12/blog-post.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/5946186730695245240'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/5946186730695245240'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/12/blog-post.html' title='नया साल मुबारक हो'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/TRn_qjwwQFI/AAAAAAAAACc/v4jvomVwsco/s72-c/dua%253D1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-1433675694617396228</id><published>2010-09-25T09:00:00.000-07:00</published><updated>2010-09-25T09:18:21.215-07:00</updated><title type='text'>ओल्ड इज गोल्ड</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/TJ4gRu_eRJI/AAAAAAAAACQ/ZcaQkFBPnRI/s1600/Shilpa-aka-yoga-tutor.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5520885682246927506" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 256px; CURSOR: hand; HEIGHT: 320px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/TJ4gRu_eRJI/AAAAAAAAACQ/ZcaQkFBPnRI/s320/Shilpa-aka-yoga-tutor.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;फैशन आए दिन बदल जाता है और कपड़े आउट ऑफ ट्रेंड हो जाते है। ऐसे में ग‌र्ल्स मेकअप किट को मेनटेन करे या नए कलेक्शन में पॉकेटमनी खर्च करें? कानपुर की ग‌र्ल्स ने इस समस्या का सस्ता, सरल और बहुत ही रचनात्मक तरीका ढूंढ निकाला है। तो अब न तो रहा जींस के घिसने का डर और न घुटने से फट जाने की टेशन!&lt;br /&gt;दीपिका से मिला आइडिया&lt;br /&gt;बीए की स्टूडेट भावना अवस्थी कहती है, ''बहुत सी ऐसी जींस मेरे वार्डरोब में पड़ी थीं, जो आउट ऑफ फैशन हो गई थीं और कुछ कहीं-कहीं से फट गई थीं। एक इंटरव्यू में मैंने दीपिका पादुकोण को टॉर्न जींस पहने देखा, तब मुझे अपनी पुरानी व फटी जींस को नया लुक देने का आइडिया आया। मैंने मेकअप किट से नेल शार्पनर निकालकर जींस को तीन-चार जगह से और रगड़ दिया। इससे मेरी ब्लू जींस पर सफेद स्पॉट दिखने लगे। यह आजकल का लेटेस्ट फैशन है। इस तरह मेरे वार्डरोब में बिना खरीदे ही चार-पांच फैशनेबल जींस आ गई।''&lt;br /&gt;फ्रेंड्स हो जाते हैं इंप्रेस&lt;br /&gt;हुनर सब में छिपा होता है, जरूरत होती है तो बस प्रैक्टिकल करने की। इसी फंडे पर अमल करते हुए कॉलेज गोइंग ग‌र्ल्स बिना किसी कोर्स के फैशन डिजाइनर बन रही है। एमबीए कर रही जाह्नंवी मल्होत्रा कहती है, ''मैं अपनी जींस खुद ही डिजाइन करती हूं। बाजार से कोई भी नॉर्मल जींस खरीद लाती हूं और उस पर कलाकारी करने लगती हूं। यह तब से शुरू हुआ, जब मेरी नई जींस रिक्शे के किनारे से फंस कर फट गई थी। मेरी फ्रेंड ने मुझे इसे सिलने का तरीका बताया। मैंने जींस पर मोटे चमकीले धागों से सिलाई की। फटी हुई जगह तो सही हो गई, पर जींस को अच्छा लुक देने के लिए मैंने दो-तीन जगह और इंब्रॉडरी स्टाइल में सिलाई कर दी। अब जब मैं यह जींस पहनती हूं तो मेरे फ्रेंड पूछते हैं कि यह नए ट्रेड की जींस तुमने कहां से खरीदी?''&lt;br /&gt;रावतपुर निवासी मीनाक्षी अरोड़ा कहती है, ''मैंने अपने पुराने कपड़ों, खास तौर पर जींस का सुंदरीकरण शुरू कर दिया है। इन दिनों कैप्री का काफी क्रेज है। मेरी जो जींस नीचे से फट गई हैं, उन्हे मैंने थोड़ा और काट दिया और घुटने तक पहुंचा दिया। अब यह बिल्कुल नई कैप्री जैसी दिखती है। इन्हे नीचे से ऐसे काटती हूं जिससे कटी हुई पट्टिंयां लटकने लगे। मेरी डिजाइनर जींस में जो बहुत अच्छी है उन्हे दिन में पहनती हूं, बाकि को रात में।''&lt;br /&gt;जो अच्छा वही फैशन&lt;br /&gt;पैंटालून के कैजुअलवेयर्स डिपार्टमेंट के सुमित गुप्ता का कहना है, ''आज जींस के डिजाइन में इतने प्रयोग किये जाते है कि जो भी पहनने में अच्छा और यूनीक लगता है, फैशन हो जाता है। इसी के चलते आज ग‌र्ल्स अपनी जींस में खुद ही प्रयोग करने लगी है। उनके कुछ डिजाइन तो ऐसे होते है जिनसे हम कई चीजें सीख सकते है।''&lt;br /&gt;बढ़ता कट-स्पॉट का क्रेज&lt;br /&gt;गुमटी निवासी यश कुमारी टेलरिंग का काम करती हैं। लेटेस्ट ट्रेड के बारे में इनका कहना है, ''इन दिनों मेरे पास ग‌र्ल्स अपनी जींस पर तरह-तरह की डिजाइन बनवाने आती हैं। वह इन पर लैस, पैच, कटं, स्पॉट आदि लगवाना पसंद करती हैं। खास तौर पर वो, जिनकी नई जींस कहीं से खराब हो गई हो। पहले तो इनको रफू करने से काम चल जाता था और यह एकदम सामान्य दिखने लगती थीं, लेकिन अब इन पर तरह-तरह के कलात्मक डिजाइन बनाए जा रहे हैं। वे खुद ही मुझे बताती हैं कि जींस को कैसे सजाना है। कुछ ऐसी होती हैं जो अपनी नई जींस भी सिलाई करवाती हैं। वे जींस के घुटने और पॉकेट के नीचे मोटे रंगीन धागों से सिलाई करवाने पर जोर देती हैं।'' अगर ऐसी ही क्रिएटिविटी कानपुर की युवतियों में दिखती रही तो कोई शक नहीं है कि शहर में किसी भी फैशन इंस्टीट्यूट को अपनी पकड़ बनाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी! (बशुकुर्य जागरण)&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-1433675694617396228?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/1433675694617396228/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/09/blog-post_25.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/1433675694617396228'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/1433675694617396228'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/09/blog-post_25.html' title='ओल्ड इज गोल्ड'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/TJ4gRu_eRJI/AAAAAAAAACQ/ZcaQkFBPnRI/s72-c/Shilpa-aka-yoga-tutor.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-9147425764634243610</id><published>2010-09-09T08:10:00.000-07:00</published><updated>2010-09-09T08:30:31.310-07:00</updated><title type='text'>ईद  मुबारक</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/TIj9ZJGwHLI/AAAAAAAAACA/pTEdauUyPDk/s1600/eid-mubarak.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5514936352097967282" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 287px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/TIj9ZJGwHLI/AAAAAAAAACA/pTEdauUyPDk/s320/eid-mubarak.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;ईद का &lt;span class=""&gt;तेहवार &lt;/span&gt;खुश्यों का तेहवार है.तमाम अहले वतन को ईद बहुत बहुत मुबारक हो.नेकी &lt;span class=""&gt;और &lt;/span&gt;ख़ुशी का ये महिना रमजान हम से रोख्सत होरा है -इस वक़्त पूरी दुन्या खुशयां मानाने की तय्यारी में डूब चूका है.बाज़ारों से ले कर घरों तक &lt;span class=""&gt;रोणक &lt;/span&gt;ही रोणक है .ये अहले इमां के &lt;span class=""&gt;लिय &lt;/span&gt;इनाम का दिन है.ये दिन लोगों के लिए खुश्यों और मसर्रतों का ख पैगाम ले कर आता है.ईद के दिन तमाम इन्सान य्क्जती का सबूत देते है.ये समाज में गरीब और परेशां हाल &lt;span class=""&gt;लोगों &lt;/span&gt;का खास ख्याल रह्खने का दिन है.टेक वोह भी इस ख़ुशी में शामिल होसके.ईद का दिन दर असल नेमत और मुसर्रत के &lt;span class=""&gt;इज़हार &lt;/span&gt;का दिन है.इस लिए खुदा की नेमतों का शुकर अदा करना चाहिए.इस मोके पर मुल्क की खुश हाली के लिए भी खास दुआ करना चाहिए-खुदा हमेर मुल्क को नज़रे बाद से बचाए .&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-9147425764634243610?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/9147425764634243610/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/09/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/9147425764634243610'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/9147425764634243610'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='ईद  मुबारक'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/TIj9ZJGwHLI/AAAAAAAAACA/pTEdauUyPDk/s72-c/eid-mubarak.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-9143502684614636508</id><published>2010-07-08T10:20:00.000-07:00</published><updated>2010-07-08T10:43:53.713-07:00</updated><title type='text'>फ़ायदा  किया हुवा ?</title><content type='html'>&lt;div align="left"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;हम किसी को अगर कोई फ़ायदा नहीं पहुंचा सकते है तो हमें उनको नुकसान aour तकलीफ पहुँचाने का भी कोई हाक नहीं है .पारदर्शन ओउर मोज़ाहेरा से ना कभी किसी को फैदा हुवा है ना कभी होगा.मगर पर्दर्शन के नाम पर आम जनता को जो तकलीफ होती है उन्हें जिस तरह की परेशानी का सामना करना परता है उसे लखना मुस्क्किल है.अपनी सेयासी रोटी सेँकने के लिए हर पार्टी के रहनुमा हर हत्क्न्दा अपनाने की कोशिश करते है जिस से जनताको सिर्फ नुकसान होता है.पिछले दिनों भारत बंद से मुल्क भर में लोगो जिस तरह से परेशानी का सामना करना परा उसका अंदाज़ा लगाना मुश्कील है.गौर करने की बात यह है के उस बंदका नतीजा किया निकला?किया मँहगाई के नाम पर होने वाले बंद से मंगाई kaम होगी .नहीं कभी  नहीं?मुल्क के रहनुमा को इस मस्ले पर मिल कर बैठना होगा सोचना होगा के आखिर रोज़ रोज़ होने वाले मोजाहरे पर्दर्शन से आम जनता को जो तकलीफ़ होती है उन्का जो नोकसान होता है उसकी भरपाई कोन करेगा.वोह लोग जिनकी समाज में कोई हैस्यत नहीं है ,नहीं कोई मक़ाम व मर्तबा है वोह अपनी हैस्यत से कहीं बारे लोगो को रोक कर उनके साथ बदतमीजी से पेश आते है.ऐसे बदमाश को लगाम कोन देगा? उनसे कोन सवाल करेगा के तुम्हारी इस गफलत और गुंडा गर्दी से लाखों का जो नुकसान हुवा है उसकी भरपाई कोन करेगा?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-9143502684614636508?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/9143502684614636508/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/07/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/9143502684614636508'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/9143502684614636508'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='फ़ायदा  किया हुवा ?'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-7899931974443191652</id><published>2010-03-23T07:07:00.000-07:00</published><updated>2010-03-23T07:24:46.335-07:00</updated><title type='text'>खूबसूरत दिल्ली की हकीकत</title><content type='html'>दिल्ली को चमकाने की जितनी कोशिश की जारही है सच्चाई ये है के आम आदमी को उस से कोई फैदा होने वाला नहीं है -इस कमर तोडती महंगाई में भला आम आदमी को जहाँ पेट भर भोजन ना मिलता हो ,पिने के लिए पानी दस्तेयाब ना हो .लोग पानी के लिए पूरी रात दर बदर भटकते हों ,अपनी मीठी नींद को सिर्फ पानी के लिए बर्बाद करते हों उन्हें खुबसुरत पार्क और ऊँचे फ्लाई ओवर  से किया फैदा?दीली वालो को इस महंगाई में रसोई गेस की जो थोड़ी बहुत सस्ती मिलती थी हकुमत ने उस ससिदी को भी च्चिन लिया -और धीरे धीरे दूसरी चीजों को भी महंगी करती जारही है -ऐसे में आम लोगे लिए दिल्ली महंगी रजधानी बानगी है -ख्याल रहे के अक्टूबर 2010 में कामनवेल्थ गेम्स के आयोजन की कामयाबी के लिए दिल्ली और केंद्र सरकार सिंगापुर और पेरिस की तर्ज पर दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने में जुटी हुई हैं। जगह-जगह फ्लाई ओवर, सब-वे, फुट ब्रिज, जल निकासी लाइन, पार्किग स्थल, मेट्रो लाइन, सड़कों को चौड़ा एवं बेहतर बनाने के कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं।&lt;br /&gt;इससे दिल्ली के आम बाशिंदों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलने पर भला किसी को क्या ऐतराज हो सकता है, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि इस सबकी अत्यंत महंगी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ रही है। न सिर्फ बस किराए और पानी के बिल बहुत महंगे हो गए, बल्कि साधारण मकानों [चाहे डीडीए या अनियमित कालोनियां हों] की कीमतें भी आसमान छू गई हैं। आते-जाते वाहनों से सड़कें इतनी व्यस्त हो गई हैं कि अनेक पैदल यात्री रोजाना दुर्घटना के शिकार होते हैं।&lt;br /&gt;कहने का मतलब यह है कि सुविचारित योजनाओं के अभाव में आम नागरिक बेहाल है, जबकि मध्यवर्ग, उच्च मध्यवर्ग, उच्चतर वर्ग, रीयल एस्टेट के मालिक-कारोबारी और उद्यमी मोटे फायदे की मलाई पा रहे हैं।&lt;br /&gt;उच्च वर्ग, उच्च मध्यवर्ग और मध्यवर्ग के लोगों की क्रय शक्ति होने से वे महंगी जमीन-जायदाद खरीदने-रहने में समर्थ हैं, सरकारी बसों की व्यवस्था न होने पर वे अपने निजी वाहनों से दूर-दराज तक आवागमन कर सकते हैं, लेकिन नीति निर्धारकों को यह सोचने की कतई फुरसत नहीं कि आवासीय दृष्टि से विकसित हो रहे इन क्षेत्रों में गरीब या आमलोग कहां और किस हाल में रह पाएंगे? क्या वे बसों का बढ़ा किराया, पानी-बिजली के महंगे बिल और आटा-सब्जियों-चीनी के आसमान छूते दाम, महंगा मकान किराया, बच्चों के स्कूलों की मोटी फीस चुकाने में सक्षम हैं?&lt;br /&gt;आखिर आम दिल्लीवासी या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के निवासी इस कमरतोड़ महंगाई में अपने परिवार का गुजारा कैसे चला सकता है?&lt;br /&gt;सरकार के विभिन्न खर्चीले अभियानों और लंबे-चौड़े दावों के बावजूद अभी तक न तो सभी लोगों के राशन कार्ड बने हैं, न ही मतदाता पहचान पत्र, न तो उनके लिए पर्याप्त स्कूल हैं, न ही चिकित्सा और परिवहन सुविधाएं। सरकार की सारी ऊर्जा दिल्ली को चमकाने के लिए रंगरोगन में लगी है, जबकि प्रत्येक नागरिक चाहे वह अमीर हो या गरीब, उसे अंदरूनी रूप से समर्थ बनाया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;यह तभी मुमकिन है, जब समावेशी विकास को तरजीह दी जाए। दिल्ली में आम लोगों के लिए सस्ती चिकित्सा, शिक्षा और परिवहन सुविधाओं की अनदेखी यही प्रकट करती है कि देर-सवेर इस शहर में गरीबों का जीवन दुश्वार हो जाएगा। दिल्ली सरकार हो या केंद्र सरकार, उनके विकास एजेंडे और नीतियों की घोषणा में आम जनता को तवज्जो देने की लंबी-चौड़ी घोषणाएं तो बहुत की जाती हैं, लेकिन उन पर मुस्तैदी से अमल देखने को नहीं मिलता।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-7899931974443191652?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/7899931974443191652/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/03/blog-post_23.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7899931974443191652'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7899931974443191652'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/03/blog-post_23.html' title='खूबसूरत दिल्ली की हकीकत'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-7829338934277325271</id><published>2010-03-13T07:04:00.000-08:00</published><updated>2010-03-13T07:23:04.072-08:00</updated><title type='text'>लालू तेरा जवाब नहीं</title><content type='html'>राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने महिला आरक्षण विधेयक पर जो सख्त  अपनाया है उस के लिए  वोह मोबार बाद के काबिल है-lआलू जी अपने मोकिफ पर अब भी कायेम है -उन्हों ने साफ कहा कि वह किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे और विधेयक के मौजूदा स्वरूप के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी।&lt;br /&gt;लालू ने मुस्लिम ख्वातीन मोर्चा के कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें मुझे लोकसभा में मार्शलों या किसी दूसरे बल के जरिए बाहर निकालने दीजिए लेकिन मैं लोकसभा में इस विधेयक को मौजूदा स्वरूप में पारित नहीं होने देने के लिए संघर्ष करता रहूंगा।&lt;br /&gt;इस विधेयक को पेश करने की कांग्रेस की जिद की परिणति जल्द चुनाव के रूप में हो सकती है। उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा कि वे मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार रहें। अपनी लड़ाई को तार्किक नतीजे तक ले जाने की इच्छा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि विधेयक के तहत अल्पसंख्यकों, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम करने वाले कामगारों तथा अन्य पिछड़े वर्ग की महिलाओं को आरक्षण का लाभ दिया जाए।&lt;br /&gt;लालू ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के मौजूदा स्वरूप को लेकर विवाद उठने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मुद्दे पर राजनीतिक पार्टियों से सलाह-मशविरा करने पर रजामंदी दी थी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-7829338934277325271?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/7829338934277325271/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/03/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7829338934277325271'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7829338934277325271'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/03/blog-post.html' title='लालू तेरा जवाब नहीं'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-8250193591407722291</id><published>2010-02-24T01:44:00.000-08:00</published><updated>2010-02-24T01:50:24.801-08:00</updated><title type='text'>ख़ुशी ज़िन्दगी का मकसद</title><content type='html'>दुन्या में सब से अच्छी बात खुश रहना ,खुश रखना और खुशिया बाँटना है-यह और बात है के परेशानियां जिंदगी का हिस्सा हैं। इसके  बावजूद उसपर मायूस  होने के इसका हल तलाशना वक़्त की अहम् ज़रूरत है -नकारात्मक सोच जिंदगी की दिशा और दशा दोनों बदल देती हैं। अपनी सोच सकारात्मक रखें। खुशियां तो आसपास बिखरी हैं। जरूरत है तो बस, इन्हें समेटने की। [इन बातों का रखें खयाल]&lt;br /&gt;* परेशानियों से कभी हार नहीं माननी चाहिए। परेशानियों में उलझने की बजाए उन्हें दूर करने पर ध्यान केंद्रित करें।&lt;br /&gt;* छोटी-छोटी बातों में ढेरों खुशियां छुपी होती हैं। इन खुशियों का स्वागत दिल खोल कर करें। खूब हंसे और मुस्कराएं।&lt;br /&gt;* आपकी कुछ आदतें भी परेशानी का कारण बनती हैं। इस बात को समझें। बेहतर होगा, इनमें सुधार लाने की कोशिश करें।&lt;br /&gt;* आलस्य से बचें। जहां तक हो वाद-विवाद से दूर रहने की कोशिश करें। अपने सहयोगियों के साथ रुखा व्यवहार न करें।&lt;br /&gt;* प्रतिदिन कुछ समय अपने उन पसंदीदा कामों के लिए निकालें, जिनसे आपको खुशी मिलती हो। जैसे बागवानी, संगीत, डांस, टीवी या किताबें पढ़ना।&lt;br /&gt;* गरीब और असहाय लोगों की यथासंभव मदद करने की कोशिश करें। इससे मिलने वाली खुशी का आनंद लें।&lt;br /&gt;* वर्तमान को जिएं। पुरानी बातें सोचकर परेशान होने के बजाए वर्तमान को संवारें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-8250193591407722291?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/8250193591407722291/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/02/blog-post_24.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/8250193591407722291'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/8250193591407722291'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/02/blog-post_24.html' title='ख़ुशी ज़िन्दगी का मकसद'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-188716832911567881</id><published>2010-02-16T07:40:00.000-08:00</published><updated>2010-02-16T07:47:36.669-08:00</updated><title type='text'>मुहब्बत है क्या चीज</title><content type='html'>प्यार को कैसे परिभाषित करेंगे? वह मुझे नहीं पता। मुझे इतना पता है कि मुझे हमेशा सच्चा प्यार मिला है। मुझे अपनी मम्मी, पापा, भाई, बहन, भतीजों और दोस्तों से जो प्यार मिला है, वह सच्चा प्यार है। मैं प्यार के मामले में लकी हूं। मुझे कुछ लड़कियों का भी सच्चा प्यार मिला है।&lt;br /&gt;[आमिर खान]&lt;br /&gt;प्यार आपकी पर्सनालिटी और नजरिए को नई दिशा देता है। पिछले चार-पांच सालों से मेरी जिंदगी में जो बड़ी तब्दीली आयी है उसकी वजह है किरण। किरण की पर्सनालिटी बेहद ब्राइट है। पॉजिटिव पर्सनालिटी है उनकी। मैं कैसे एक्सप्लेन करूं? जो एक नहर होती है न.. वाइब्रेंट और प्लेफुल । उनकी पर्सनालिटी वैसी ही है। पिछले पाच सालों में उनके प्यार और उनके साथ बिताए गए वक्त के कारण ही मेरी पर्सनालिटी में फर्क आया है। मैं थोड़ा रिलैक्स हुआ हूँ। जब किरण जी से मेरी मुलाकात हुई,उनसे मेरी रिलेशनशिप बढ़ी तो मुझे लगा कि मैं खुल गया हूँ। मुझमें बदलाव आया है मैं महसूस करता हूँ। मेरा मानना है कि प्यार आज हो या कल.. वह आपके जीवन को नए मायने देता रहा है और देता रहेगा।&lt;br /&gt;[कैट्रीना कैफ]&lt;br /&gt;प्रेम अजीब सी फीलिंग है। इसे डिफाइन करना मुश्किल है, लेकिन इसमें गजब का मजा आता है। मैं इतना जानती हूं कि प्रेम आपको ताकत देता है। दुनिया को अलग तरीके से देखने का नजरिया देता है। प्रेम में आप दूसरे की फीलिंग का ध्यान रखते हैं। प्रेम में इंसान स्वार्थी नहीं हो सकता। जिस इंसान को प्रेम होता है वह मेच्योर हो जाता है। कह सकते हैं कि प्रेम मैच्योरिटी लाता है। यदि इंसान को सच्चा प्यार मिल जाए तो समझिए कि वह बहुत लकी है। सच्चा प्यार आपको जिंदगी में आगे बढ़ने में मदद करता है। मैं सच्चे प्यार में बिलीव करती हूं।&lt;br /&gt;[दीपिका पादुकोन]&lt;br /&gt;सभी प्यार करते हैं। सभी किसी के साथ प्यार-भरे रिश्ते में बंधते हैं और एक वक्त पर शादी भी करते हैं,पर प्यार को लेकर हर किसी का एप्रोच अलग होता है,समझ अलग होती है। प्यार आप किसी से भी कर सकते हैं.अपने माता-पिता से,दोस्त से या फिर खुद से। प्यार के लिए जो चीज सबसे जरूरी होती है.वह है,विश्वास। एक-दूसरे पर विश्वास की बुनियाद पर प्यार टिका रह सकता है। मुझे लगता है,प्यार की जो भावना होती है,वह हमेशा एक-जैसी रहती है। उसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया है और ना आएगा। हां,एक बात मैं मानती हूँ कि प्यार ढूंढने की जरूरत नहीं होती। जब और जहाँ प्यार होना होता है,हो जाता है।&lt;br /&gt;[करीना कपूर]&lt;br /&gt;जब आप किसी रिलेशनशिप में होते हैं, तो आपका चेहरा हमेशा खिला-खिला होता है। मेरे लिए तो प्यार एक सेलीब्रेशन है..फिर प्यार को छिपाना कैसा? प्यार किसी वजह से नहीं होता। उम्र भी कोई मायने नहीं रखती। प्यार के लिए यह जरूरी होता है कि आप किसी पर्सन को कैसे देखते हैं? उनके साथ कैसा महसूस करते हैं? मुझे सैफ की उम्र से कोई तकलीफ नहीं है। मुझे तो अच्छा लगता है कि उन्होंने मुझसे ज्यादा दुनिया देखी है। उन्हें मुझसे ज्यादा अनुभव है। मेरे लिए तो सैफ ही मेरी दुनिया हैं।&lt;br /&gt;[प्रियंका चोपड़ा]&lt;br /&gt;समय भले ही बदल गया है, लेकिन प्यार की परिभाषा और प्यार का अर्थ नहीं बदला है। मुझे लगता है कि प्यार करने वाले लोग बदल गए हैं। समय के साथ उनका अंदाज बदल गया है। प्यार को एक्सप्रेस करने का तरीका बदल गया है, लेकिन प्यार नहीं बदला है। प्यार का अहसास नहीं बदला है। आज भी जब कोई प्यार में होता है तो उसे सब कुछ अच्छा लगता है। वह खुश होता है। मैं सच्चे प्यार में विश्वास करती हूं। सच्चा प्यार वह होता है जो लाख मुश्किलें आएं फिर भी न बदले। सच्चा प्यार बहुत मुश्किल से मिलता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-188716832911567881?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/188716832911567881/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/02/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/188716832911567881'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/188716832911567881'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='मुहब्बत है क्या चीज'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-577906341769676598</id><published>2010-01-23T07:01:00.000-08:00</published><updated>2010-01-23T07:18:27.084-08:00</updated><title type='text'>कहाँ गए नेताजी, कब खुलेगा मौत का राज?</title><content type='html'>इस मर्तबा भी 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन हर साल की तरह ही मनाया गया और रस्मी तौर पर उन्हें याद किया गया , पर आजादी के बासठ साल से ज्यादा गुजर जाने के बावजूद 23 जनवरी 1897 को जन्मे भारत के स्वतंत्रता आदोलन के इस नायक की मौत के बारे में सही जानकारी अब तक लोगों को नहीं मिल पाई है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान आखिर कैसे गई?&lt;br /&gt;यह एक ऐसा सवाल है, जो हर हिंदुस्तानी को सोचने पर मजबूर कर देता है। बीते दिनों सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारियों के बाद इस अनसुलझी पहेली के तार और ज्यादा उलझते नजर आ रहे हैं। पर सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर नेताजी की मौत की गुत्थी को सुलझाने के लिए कोई सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही है। सरकारी महकमा कहता आया है कि 1945 में हुई विमान दुर्घटना में ही नेताजी की मौत हो गई। पर इस महान देशभक्त में रुचि रखने वालों और नेताजी पर अध्ययन करने वालों का दावा है कि नेताजी की जान विमान हादसे में नहीं गई थी। पर अहम सवाल यह है कि ये दावे तथ्यों और तर्को की कसौटी पर कितना खरे उतरते हैं?&lt;br /&gt;18 अगस्त 1945 को कथित तौर पर ताईवान में एक विमान दुर्घटना हुई थी। भारत सरकार कहती रही है कि इस हादसे में मरने वालों में नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी शामिल थे। अब तक यह कहा जाता रहा है कि महात्मा गाधी से बगावत करके जापान की मदद से आजाद हिंद फौज का गठन करके फिरंगियों के खिलाफ भारत की आजादी के लिए जंग छेड़ने वाले नेताजी की अस्थिया जापान के रेंकोजी टेंपल में रखी हुई हैं।&lt;br /&gt;नेताजी की मौत की गुत्थी को सुलझाने के लिए बनी शाहनवाज कमेटी और खोसला कमीशन की रिपोर्ट भी इसी बात की पुष्टि करती है। पर मामले का दूसरा पहलू हैरत में डालने वाला है। अब यह कहा जा रहा है कि नेताजी की मौत उस विमान हादसे में नहीं हुई थी। अब इस पर भी विवाद पैदा हो गया है कि विमान दुर्घटना हुई भी थी या नहीं। उस कथित विमान हादसे पर सवालिया निशान खुद ताइवान सरकार लगा रही है।&lt;br /&gt;ताईवान सरकार ने कहा है कि 18 अगस्त 1945 को वहा कोई विमान हादसा नहीं हुआ था। ऐसा होता तो ताईवान के अखबारों में उस समय यह खबर जरूर छपी होती।&lt;br /&gt;वर्ष 1999 में एनडीए सरकार ने नेताजी की मौत की तहकीकात के लिए जस्टीस एमके मुखर्जी की अध्यक्षता में मुखर्जी आयोग का गठन किया। मुखर्जी आयोग ने भी इस बात की पुष्टि कर दी कि नेताजी की मौत उस कथित विमान हादसे में नहीं हुई थी।&lt;br /&gt;अहम सवाल यह है कि आखिर किस रिपोर्ट को सही माना जाए। एनडीए के नेता कहते रहे हैं कि नए तथ्यों के अधार पर मुखर्जी आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा था कि नेताजी की मौत उस विमान हादसे में नहीं हुई। पर सियासी वजहों से काग्रेस सरकार ने उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया।&lt;br /&gt;इससे इतना तो साफ है कि एक महान देशभक्त की मौत पर भी अपने देश के नेता सियासत करने से बाज नहीं आए। सोचने वाली बात यह भी है कि आखिर काग्रेस के राज में गठित कमेटी उसकी मर्जी के मुताबिक और एनडीए के राज में बनाई गई कमेटी उसकी विचारधारा के मुताबिक रिपोर्ट क्यों देती है?&lt;br /&gt;बड़ा सवाल यह है कि स्वतंत्रता की लड़ाई के एक महान नायक नेताजी के बारे में आजाद भारत के लोगों को सच्चाई का पता कब चल पाएगा? मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट आने के पहले भी नेताजी की मौत को लेकर खासा विवाद रहा है। कई लोग लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि जापान के रेंकोजी मंदिर में रखी गई अस्थिया नेताजी की नहीं, बल्कि वह एक जापानी सैनिक की है, लेकिन सरकार इसे ही नेताजी की अस्थिया मानती रही है और जापान दौरे पर जाने वाले हिंदुस्तानी नेता भी इसी के आगे सिर झुकाते रहे हैं।&lt;br /&gt;अब यह बात खुल गई है कि जापान के रेंकोजी मंदिर में 1945 से संभाल कर रखी जा रही अस्थिया नेताजी की नहीं हैं। मुखर्जी आयोग ने इस बात की पुष्टि तो की ही, साथ ही इस मसले पर 1965 में बनाई गई शाहनवाज जाच समिति में भी मतभेद रहा है।&lt;br /&gt;शाहनवाज समिति के तीसरे सदस्य नेताजी के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा है कि इस बात का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर यह मान लिया जाए कि टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में रखी अस्थिया नेताजी की हैं।&lt;br /&gt;नेताजी को जिस कथित विमान हादसे का शिकार बताया जाता है, उसमें उनके साथ लेफ्टिनेंट कर्नल हबीबुर्रहमान खान भी थे। उनसे इस बारे में कई बार पूछताछ की गई। उन्होंने बार-बार यही कहा कि नेताजी उस विमान दुर्घटना में बुरी तरह जल गए थे और इसके बाद उनकी मौत अस्पताल में हो गईं थी। सुभाष चंद्र बोस से जुड़े विषयों पर काम करने वाली संस्था मिशन नेताजी के लोगों ने जब इस बारे में तथ्यों को खंगाला तो उन्हें इस बात के पुख्ता प्रमाण मिले कि रहमान ने नेताजी के बारे में जो कहा वह सच नही था। 1946 में जब उन्हें अपने मित्र और नेताजी के सचिव मेजर ई भास्करन ने नेताजी की मौत के बारे में कुरेदा तो रहमान ने कहा था कि उन्होंने नेताजी को वचन दे रखा, लिहाजा इस बारे में कुछ नहीं कह सकते।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-577906341769676598?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/577906341769676598/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/01/blog-post_23.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/577906341769676598'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/577906341769676598'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/01/blog-post_23.html' title='कहाँ गए नेताजी, कब खुलेगा मौत का राज?'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-203500822281734499</id><published>2010-01-18T01:35:00.000-08:00</published><updated>2010-01-18T01:38:30.062-08:00</updated><title type='text'>नहीं रहे ज्योति बसु</title><content type='html'>ज्योति बसु नहीं रहे। 95 साल की उम्र में उन्होंने अलविदा कहा। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने बहुत सारी बुलंदिया तय कीं जो किसी भी राजनेता के लिए सपना हो सकता था। 1977 में काग्रेस की पराजय के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल का मुख्य मंत्री बनाया गया था और जब शरीर कमजोर पड़ने लगा तो उन्होंने अपनी मर्जी से गद्दी छोड़ दी और बुद्धदेव भट्टाचार्य को मुख्यमंत्री बना दिया गया।&lt;br /&gt;1977 के बाद का उनका जीवन एक खुली किताब है। मुख्यमंत्री के रूप में उनका सार्वजनिक जीवन हमेशा कसौटी पर रहा, लेकिन उनको कभी किसी ने कोई गलती करते नहीं देखा, न सुना। 1996 की वह घटना दुनिया जानती है, जब वे देश के प्रधान मंत्री पद के लिए सर्वसम्मत उम्मीदवार बन गए थे, लेकिन दफ्तर में बैठकर राजनीति करने वाले कुछ साचाबद्ध कम्युनिस्टों ने उन्हें रोक दिया। अगर ऐसा न हुआ होता तो देश देवगौड़ा को प्रधान मंत्री के रूप में न देखता। बहरहाल बाद के समय में यह भी कहा कि 1967 में प्रधानमंत्री पद न लेना मा‌र्क्सवादियों की ऐतिहासिक भूल थी। उस हादसे को ऐतिहासिक भूल मानने वालों में भी बहुत मतभेद है।&lt;br /&gt;1977 में मुख्य मंत्री बनने के बाद वे एक राज्य के मुखिया थे, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति पर उनकी पकड़ हमेशा बनी रही। 1989 में जब राजीव गांधी की काग्रेस चुनाव हार गई, तो आम तौर पर माना जा रहा था कि कोई भी सरकार बनाना बहुत ही मुश्किल है।&lt;br /&gt;वीपी सिंह को ज्यादातर विपक्षी पार्टिया प्रधानमंत्री बनाने की कोशिश में थीं, लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा था कि लेफ्ट फ्रंट और बीजेपी एक ही सरकार का कैसे समर्थन करेंगें? ज्योति बसु ने बार-बार कहा था कि बीजेपी पूरी तरह से सांप्रदायिक पार्टी है, तो कैसे जाएंगें उनके साथ, लेकिन ज्योति बसु और हरकिशन सिंह सुरजीत ने मिलकर ऐसा फार्मूला बनाया कि बीजेपी को वीपी सिंह को बाहर से समर्थन करने में कोई दिक्कत नहीं रह गई।&lt;br /&gt;प्रणय राय के साथ एक टेलीविजन कार्यक्रम में सुरजीत ने ऐलान कर दिया था कि वे वीपी सिंह को प्रधान मंत्री बनाने को तैयार हैं बशर्ते कि उस में बीजेपी का कोई मंत्री न हो। बस बन गई सरकार। बहुत सारी यादें है ज्योति बाबू की जिन्होंने पिछले कई दशकों की भारतीय राजनीति को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;ज्योति बसु को कुछ लोग बहुत ही भाग्यशाली मानते थे, क्योंकि जिंदगी में हमेशा उन्हें महत्व मिला। भारतीय राजनीति के निराले व्यक्तित्व थे ज्योति बसु उन्होंने अपना पहला चुनाव 1946 में लड़ा था। चुनाव जीते भी, लेकिन यह महत्वपूर्ण नहीं है। इस चुनाव में उन्होंने प्रोफेसर हुमायूं कबीर को हराया था जो मौलाना आजाद के बहुत करीबी थे। बाद में वे नेहरू की मंत्रिपरिषद में मंत्री भी बने। उसी वक्त से वे बंगाल के नौजवानों के हीरो बने, तो बहुत दिनों तक श्रद्धा के पात्र बने रहे।&lt;br /&gt;कोलकाता के नामी सेंट जेवियर कालेज में पढ़ाई पूरी करने के बाद वे इंग्लैंड गए, जहा उन्होंने कानून की पढ़ाई की। लंदन में उनके समकालीनों में इंदिरा गांधी, फीरोज गांधी, वी के कृष्ण मेनन और भूपेश गुप्ता जैसे लोग थे।&lt;br /&gt;लंदन के विश्व विख्यात लिंकल इंस्टीट्यूट से पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वे कोलकाता आए, तो कुछ दिन छोटी-मोटी वकालत करने के बाद ट्रेड यूनियन के काम में जुट गए। उन्होंने कम्युनिस्ट विचारधारा को चुना था और दिल्ली दरबार की कभी परवाह नहीं की। एक बार केंद्र सरकार से पश्चिम बंगाल के लिए केंद्रीय सहायता की बात करने दिल्ली पंहुचे ज्योति बसु से किसी केंद्रीय मंत्री ने शिकायत भरे लहजे में कहा कि आप समस्याएं ही गिनाते हैं, कभी कोई हल नहीं बताते, ज्योति बाबू का जवाब तुरंत मिल गया, 'जब हम आपकी सीट पर बैठेंगें, तब हल भी बताएंगें।'&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-203500822281734499?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/203500822281734499/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/01/blog-post_18.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/203500822281734499'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/203500822281734499'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/01/blog-post_18.html' title='नहीं रहे ज्योति बसु'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-1488023534585057755</id><published>2010-01-05T07:27:00.000-08:00</published><updated>2010-01-05T07:36:30.532-08:00</updated><title type='text'>सच्चाई किया है</title><content type='html'>&lt;span class=""&gt; picchle dino  teen  आतंकी&lt;/span&gt;  की फरारी पर आरोप-प्रत्यारोप  का दौर शुरू है-मगर इसके पीछे की सच्चाई को कोई नहीं जानता-असल हकीक़त किया है यह तो आने वाला &lt;span class=""&gt;वक़त h&lt;/span&gt;इ बताएगा मगर इतनी बात ज़रूर है के इस मामले में सर्कार और पुलिस की नियत ठीक नहीं है-ख्याल रहे  के लाल किला कांड में सजा पूरी होने के बाद हिरासत से तीन पाकिस्तानी आतंकियों की फरारी से दिल्ली पुलिस ने अपना पल्ला पूरी तरह झाड़ लिया है। गृह मंत्रालय के कारण बताओ नोटिस के जवाब में दिल्ली पुलिस ने तीनों आतंकियों की फरारी का जिम्मा परोक्ष रूप से गृह मंत्रालय पर ही डाल दिया है। दिल्ली पुलिस ने अपने जवाब में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नियमों और अपनी सीमाओं का हवाला देते हुए साफ कहा है कि सजा पूरी होने के बाद तीनों आतंकी विदेशी नागरिक क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय [एफआरआरओ] की सुपुर्दगी में थे। और यह कार्यालय गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-1488023534585057755?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/1488023534585057755/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/01/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/1488023534585057755'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/1488023534585057755'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2010/01/blog-post.html' title='सच्चाई किया है'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-416871579510160872</id><published>2009-11-20T10:19:00.000-08:00</published><updated>2009-11-20T10:32:04.859-08:00</updated><title type='text'>महाराष्ट्र में गुंडा राज,अब मीडिया पर हमला</title><content type='html'>महाराष्ट्र में शिवसेना  की गुंडा गर्दी दिन बदिन बदती जारही है-अब  शिवसेनाko ने  मीडिया पर भी हमला शुरू कर दिया है। शुक्रवार शाम करीब दो दर्जन शिवसैनिकों ने मुंबई के विक्रोली क्षेत्र स्थित आईबीएन 7 एवं आईबीएन लोकमत के दफ्तर पर हमला बोल कर न सिर्फ़ जम कर तोड़फोड़ एवं पत्रकारों से मारपीट की बल्कि शिवसैनिकों ने चेतावनी दी कि बाल ठाकरे के खिलाफ बोलने या लिखने वाले के साथ ऐसा ही होगा। शिवसेना और मनसे अब तक मराठी भाषा के मुद्दे पर हिंदीभाषियों को ही निशाना बनाते रहे -यह पहला अवसर पर है जब उन्होंने अपनी नीति से असहमति जताने वाले किसी मराठी चैनल को भी निशाना बनाया है। लगभग दो दर्जन शिवसैनिक शिवसेना जिंदाबाद का नारा लगाते हुए आईबीएन चैनल के दफ्तर में घुसे और सामने बैठी महिला रिसेप्सनिस्ट पर हमला किया। फिर उन्होंने रिसेप्सनिस्ट को बचाने आगे आए दफ्तर के सुरक्षागार्डो के साथ मारपीट शुरू की। हमलावरों के हाथ में लोहे के राड, बेसबाल के बैट और क्रिकेट के विकेट थे। वे मराठी चैनल आईबीएन-लोकमत के प्रमुख निखिल वागले को ढूंढते हुए दफ्तर के अंदर आ गए। वागले के सामने पड़ते ही उन्होंने उन पर हमला बोल दिया और दफ्तर में तोड़फोड़ करने -गौरतलब है कि शिवसैनिकों का रोष करीब पांच दिन पहले सचिन तेंदुलकर को लिखे बाल ठाकरे के पत्र पर आईबीएन लोकमत की भूमिका को लेकर था। तब चैनल ने मराठी बुद्धिजीवियों की बहस आमंत्रित कर शिवसेना प्रमुख को कठघरे में खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण एवं गृह मंत्री आर.आर. पाटिल ने घटना की निंदा करते हुए हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। मगर किया मुंबई हकुमत इन बदमासों और गुंडों को पकड सकेगी ?शिवसैनिकों के गुंडों के खिलाफ कार्रवाई हो गी?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-416871579510160872?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/416871579510160872/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_20.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/416871579510160872'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/416871579510160872'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_20.html' title='महाराष्ट्र में गुंडा राज,अब मीडिया पर हमला'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-4005293038566968937</id><published>2009-11-18T05:56:00.000-08:00</published><updated>2009-11-18T06:20:59.990-08:00</updated><title type='text'>बेटी रहमत भी है और नेमत भी</title><content type='html'>&lt;p&gt; एमडीडीएम  मुज़फ्फरपुर में यूएनएफपीए की ओर से आयोजित 'सपनों को चली छूने' कार्यक्रम के उद्घाटन पर जब बात उठी बेटियों की हिफाजत की तो   लगभग दो हजार बेटियों की आंखों से आंसू फूट पड़ा-मानो वजूद कायम रखने का सपना बर्फ की मानिंद पिघल कर बाहर आने लगा। कोख में मार डाली जाने वाली बेटियों की चर्चा करते डा। विजया भारद्वाज की  पहले डबडबाई थीं -उन्होंने कहा कि पति चाहे कितना भी दबाव दे, कभी अपनी कोख में बच्ची को मत मारिएगा। मेरे पास महिलाएं आती हैं, कहती हैं कि पांचवीं बेटी है, परिवार में मारने का दबाव है। वह रोती है, मैं भी रोती हूं। और बस। इतना बोलते-बोलते डा.भारद्वाज की आंखें छलक आईं तो छात्राएं भी आंसुओं को बहने से नहीं रोक सकीं।  सवाल यह है की जब हमारे समाज में बेटी को रहमत और बड़ी नेमत कहा गया है तो फिर बेटी के साथ ऐसा दोहरा सलोक किउँ होता है-इस्लाम मज़हब में बेटी की अहमियत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है की रसूलुल्लाह सल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया ''जिसने दो बेटी की परवरिश की और  उसे अच्छी तर्ब्यत दी क़यामत के दिन मैं और वोह इस तरह आएँगे जिस तरह मेरे हाथ की ये दो उन्गुल्या ,,&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यही वजह है की इस्लाम में बेटी की बड़ी अहमियत है मगर चंद न अक्ल इन्सान ऐसी ग़लत हरकत करते है यकीनन वोह सज़ा के मुसतहिक़ है -बेटा बेटी में किसी तरह का फर्क करना किसी भी तरह से सही नही है बलके गुनाह ख कम है-&lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-4005293038566968937?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/4005293038566968937/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_18.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/4005293038566968937'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/4005293038566968937'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_18.html' title='बेटी रहमत भी है और नेमत भी'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-7379077468221299019</id><published>2009-11-12T08:03:00.000-08:00</published><updated>2009-11-12T08:20:37.520-08:00</updated><title type='text'>सबके लिए शिक्षा अब भी एक सपना</title><content type='html'>आजादी के छह दशक से अधिक समय गुजरने के बावजूद आज भी देश में सबके लिए शिक्षा एक सपना ही बना हुआ है। देश में भले ही शिक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने की कवायद जारी है, लेकिन देश की बड़ी आबादी के गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करने के मद्देनजर सभी लोगों को साक्षर बनाना अभी भी चुनौती बनी हुई है।&lt;br /&gt;सरकार ने हाल ही में छह से 14 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए अनिवार्य एवं मुफ्त शिक्षा प्रदान करने का कानून बनाया है, लेकिन शिक्षाविदों ने इसकी सफलता पर संदेह व्यक्त किया है क्योंकि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जद्दोजहद में लगा हुआ है।&lt;br /&gt;सरकार के प्रयासों के बावजूद प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। इनमें बालिका शिक्षा की स्थिति गंभीर है। विश्व बैंक की हालिया रपट में भारत में माध्यमिक शिक्षा की उपेक्षा किए जाने पर जोर देते हुए कहा गया है कि इस क्षेत्र में हाल के वर्षो में निवेश में लगातार गिरावट देखने को मिली है। शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले खर्च का जहां प्राथमिक शिक्षा पर 52 प्रतिशत निवेश होता है वहीं दक्ष मानव संसाधान को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में कुल खर्च का 30 प्रतिशत ही निवेश होता है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा के कुल खर्च का 18 प्रतिशत हिस्सा आता है। भारत में माध्यमिक स्तर पर 14 से 18 वर्ष के बच्चों का कुल नामांकन प्रतिशत 40 फीसदी दर्ज किया गया है। उच्च शिक्षा की स्थिति भी उत्साहव‌र्द्धक नहीं है। फिक्की की ताजा रपट में कहा गया है कि महत्वपूर्ण विकास के बावजूद भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में कई तरह की खामियां हैं जो भविष्य की उम्मीदों के समक्ष चुनौती बन कर खड़ी है।&lt;br /&gt;उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकल नामांकन दर की खराब स्थिति को स्वीकार करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि स्कूल जाने वाले 22 करोड़ बच्चों में केवल 2.6 कच्रोड़ बच्चे कालेजों में नामांकन कराते हैं। इस तरह से 19.4 करोड़ बच्चे स्कूली शिक्षा से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।&lt;br /&gt;सरकार का लक्ष्य उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर को 12 प्रतिशत से बढ़ा कर 2020 तक 30 प्रतिशत करने का है। इन प्रयासों के बावजूद 6.6 करोड़ छात्र ही कालेज स्तर में नामांकन करा पाएंगे, जबकि 15 करोड़ बच्चे कालेज स्तर पर नामांकन नहीं जा पाएंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-7379077468221299019?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/7379077468221299019/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_12.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7379077468221299019'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7379077468221299019'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_12.html' title='सबके लिए शिक्षा अब भी एक सपना'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-2521486329821961690</id><published>2009-11-11T08:33:00.000-08:00</published><updated>2009-11-11T08:38:41.823-08:00</updated><title type='text'>ऐसा भी होता है</title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;span class=" transl_class" id="0" title="Click to correct"&gt;भागदौड़&lt;/span&gt; भरी जिंदगी में तनाव होना आम है। इसका शिकार पुरुष भी हो सकते हैं और स्त्रियां भी। जो &lt;span class=" transl_class" id="1" title="Click to correct"&gt;चूल्हा&lt;/span&gt;-चौके में ही खप रही हैं, उन्हें इस बात का तनाव है कि नौकरी नहीं करती हैं। जो नौकरी करती हैं उनकी परेशानी यह है कि बाहर के साथ घर की देखभाल भी करनी पड़ रही है। कई बार उनके गुस्से के शिकार उनके बच्चे होते हैं। कैसा हो अगर ऐसी महिलाओं को अपना गुस्सा उतारने के लिए किराए पर एक जीता-जागता आदमी मिल जाए, और उसे मारकर वह अपनी भड़ास निकालें। उत्तर-पूर्वी चीन के शेनयांग में तो एक शख्स ने यह सेवा शुरू भी कर दी है। वह पैसे लेकर महिलाओं से खुद को पिटवाता है। जियाओ लिन नाम का यह शख्स एक जिम का &lt;span class=" transl_class" id="2" title="Click to correct"&gt;कोच&lt;/span&gt; है। उसने तनावग्रस्त महिलाओं को अपनी भड़ास निकालने के लिए खुद को एक पंचबैग [मुक्के मारने वाला बैग] की तरह इस्तेमाल करने के लिए पेश किया है। लिन को मारने के लिए महिलाओं को एक कीमत अदा करनी पड़ती है। अपने इस नए कारोबार के बारे में उसने अपने परिवार को नहीं बताया है। बकौल लिन, 'मैं दिन में जिम में लोगों को प्रशिक्षण देता हूं। शाम को मैं ये अंशकालिक काम करता हूं। इस काम के लिए मुझे और भी साथियों की तलाश है। लिन अपने इस पेशे से काफी रोमांचित हैं। उन्होंने कहा, 'महिलाओं के लिए पंचबैग बनकर मैं कुछ पैसे भी कमा लेता हूं। इसके साथ-साथ खुद को बचाने की कला में भी मुझे निपुणता हासिल हो रही है। ऐसा करने में मेरा शारीरिक नुकसान भी नहीं है।' ये जनाब आधे घंटे तक पिटने के लिए 100 युआन [करीब 700 रुपये] लेते हैं। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए उनके पास ग्राहक भी आने लगी हैं। लिन के अनुसार, 'उनकी पहली ग्राहक 25 साल की लड़की है। उसने आधा घंटे की कीमत अदा की। लेकिन वो जल्द ही थक गई। उसने बाकी समय मेरे साथ बातचीत करके निकाला। दूसरी ग्राहक भी ऐसी ही थी। वो भी जल्द ही थक गई। लेकिन मुझे पीटने के बाद दोनों ही बहुत संतुष्ट दिखाई दीं।' उनका कहना है कि ऐसा करके वह तनावग्रस्त महिलाओं की मदद कर रहे हैं।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-2521486329821961690?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/2521486329821961690/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_11.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/2521486329821961690'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/2521486329821961690'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_11.html' title='ऐसा भी होता है'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-5637620015563235948</id><published>2009-11-09T08:27:00.000-08:00</published><updated>2009-11-09T09:52:30.536-08:00</updated><title type='text'>विधानसभा में राष्ट्रभाषा का अपमान</title><content type='html'>समाजवादी पार्टी के विधायक अबू असीम आजमी के हिंदी में शपथ लेने पर महाराष्ट्र विधानसभा में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना [मनसे] के विधायकों ने जिस तरह से हंगामा  है वोह देश केलिए अच्छी बात नही है-यह भाशकी  बुन्याद पर मुल्क को बाँटने की एक कोशिश है-अगर मुल्क के नेता का यही हालरहा तो इस देश को एक और बटवारे से कोई नही रोक सकता -इस की जितनी निंदा की जाए कम है-विधानसभा में आज की घटना की जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने घोर निंदा की और इसे राष्ट्रभाषा का अपमान बताया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने राम कदम तथा अन्य लोगों द्वारा सपा विधायक अबू आजमी के हिंदी में शपथ लिए जाने पर की गई अभद्रता की कड़े शब्दों मे निंदा करते हुए कहा कि अबू आजमी ने हिंदी में शपथ लेकर न केवल राष्ट्रभाषा का बल्कि पूरे देश का सम्मान बढ़ाया है।&lt;br /&gt;आजमी के हिंदी में शपथ लेने की शुरुआत करने के साथ ही मनसे के सभी 13 सदस्य आजमी की ओर दौड़े और उनसे माइक छीन लिया। वे आजमी के मराठी में शपथ लेने की मांग को लेकर नारे लगाने लगे। मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और ऊर्जा मंत्री अजीत पवार ने सदन में शांति कायम रखने की कोशिश की। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने पिछले महीने घोषणा की थी कि उनकी पार्टी के सदस्य सुनिश्चित करेंगे कि सभी विधायक मराठी में शपथ लें। राज ने चेतावनी दी थी कि अगर कोई विधायक मराठी में शपथ नहीं लेगा, तो सदन देखेगा कि क्या होता है। उधर, शरद यादव ने महाराष्ट्र विधानसभा की घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विधानसभा के अंदर हुई यह घटना एक तरह से संविधान का ब्रेकडाउन है क्योंकि सरकार और सदस्य दोनों ही संविधान की शपथ लेते हैं।&lt;br /&gt;उन्होंने इसे राष्ट्रभाषा का अपमान और देश की एकता अखंडता के लिए खतरा बताया और कहा कि सभी दलों को इस घटना का विरोध करना चाहिए।&lt;br /&gt;यह सच है कि आज हुई घटना के बाद अबू आजमी को पूरा देश सम्मान की नजर से देख रहा है और इस तरह का तमाशा करने वाले चूहे बिल्ली की तरह होते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-5637620015563235948?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/5637620015563235948/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_09.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/5637620015563235948'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/5637620015563235948'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_09.html' title='विधानसभा में राष्ट्रभाषा का अपमान'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-4785596073657786827</id><published>2009-11-06T06:48:00.000-08:00</published><updated>2009-11-06T07:01:05.697-08:00</updated><title type='text'>हिंदी पत्रकारिता के एक युग का खतिमा</title><content type='html'>हिंदी पत्रकारिता के प्रमुख स्तंभ प्रभाष जोशी के निधन के साथ ही हिंदी पत्रकारिता के एक युग का अवसान हो गया। उन्हें परंपरा और आधुनिकता के साथ भविष्य पर नजर रखने वाले पत्रकार के रूप में सदा याद किया जाएगा। वरिष्ठ आलोचक नामवर सिंह ने कहा कि अब कागद कारे पढ़ने को नहीं मिलेगा, कागद अब कोरे ही रहेंगे। ऐसा लगता है, मंगलवार आधी रात सचिन के 17 हजार रन से एक तरफ उन्हें खुशी हुई और भारत की हार का आघात लगा..।&lt;br /&gt;वरिष्ठ कवि और समालोचक अशोक बाजपेई ने कहा कि यह सिर्फ हिंदी पत्रकारिता का नुकसान नहीं है, बल्कि हिन्दी समाज और बुद्धिजगत की भी क्षति है। हिन्दी में उनके जैसे सर्वमान्य बुद्धिजीवी काफी कम है, जिन्हें सभी ध्यान से पढ़ते हों। उन्होंने कहा कि प्रभाष जी ने अनोखी लेखनी विकसित की और पत्रकारिता के माध्यम से हिंदी को बेहतरीन गद्य दिए। कहां क्रिकेट और कहां कुमार गंधर्व, कहां राजनीति और कहां हिंद स्वराज, इन सभी विपरीत धु्रवों को एक साथ साधना हर किसी के बस में नहीं है।&lt;br /&gt;मृत्यु की खबर पाकर प्रभाष जी के आवास पर पहुंचने वालों में भाजपा के लाल कृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह और कलराज मिश्र, पूर्व सांसद संतोष भारती व एम जे अकबर, हंस के संपादक राजेन्द्र यादव, एनडीटीवी के पंकज पचौरी, सीएनएन आईबीएन के राजदीप सरदेसाई, समाजसेवी सुनीता नारायण प्रमुख थे। ज्ञानपीठ के निदेशक रवीन्द्र कालिया ने समूचे ज्ञानपीठ परिवार की ओर से गहरी संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि प्रभाष जी हिन्दी पत्रकारिता का उज्ज्वल नाम थे और दिल्ली के सांस्कृतिक जीवन में उनकी उपस्थिति बेहद अहम थी। उन्होंने कहा कि वह क्रिकेट से लेकर राजनीति तक लिखने वाले हिन्दी के एक मात्र संपादक थे, उनकी राजनीति की समझ काफी गहरी थी और क्रिकेट पर वह दिल से लिखते थे। हिंदी समाचार का विश्लेषण करने में वह लोकप्रिय नाम थे।&lt;br /&gt;हिंदी अकादमी के अध्यक्ष अशोक चक्रधर ने व्यक्तिगत क्षति बताते हुए कहा कि युग का अंत मुहावरा होता है, लेकिन प्रभाष जी के निधन के साथ ही परंपरा और आधुनिकता के साथ भविष्य दृष्टि रखने वाली बेलाग और निर्भीक पत्रकारिता के एक युग का सचमुच अवसान हो गया। उन्होंने कहा कि गांधीवादी होने के बावजूद क्रिकेट के प्रति उनका रागात्मक लगाव रहा जिसके चलते उनमें युवाओं जैसा जोश दिखाई देता था। हिंदी पत्रकारिता में क्रिकेट को जोड़ना उनका एक अहम योगदान रहा। उन्होंने कहा कि मालवी भाषा को पत्रकारिता में लाना उनका दूसरा सबसे बड़ा योगदान था। जोशी के निधन के साथ ही हिंदी ने राजेन्द्र माथुर की पीढ़ी का सबसे सशक्त हस्ताक्षर खो दिया।&lt;br /&gt;हंस के संपादक राजेन्द्र यादव ने कहा कि मैं उन्हें हिंदी का तीसरा सबसे बड़ा पत्रकार [अज्ञेय और राजेन्द्र माथुर के बाद मानता हूं], जिन्होंने भाषा, प्रतिमानों और छवि को बदलने में अहम योगदान दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें क्रिकेट का बड़ा क्रेज था और क्रिकेट ही उन्हें ले डूबा..। मैंने उनसे अधिक क्रिकेट का क्रेजी पत्रकार नहीं देखा। वह हर विषय पर बेलाग बोलने वाले बुद्धिजीवी थे।&lt;br /&gt;वरिष्ठ लेखक और स्तंभ लेखक महीप सिंह ने कहा कि जोशी जी ने हिन्दी पत्रकारिता को राष्ट्रीय स्तर तक उठाया और इसे गंभीर स्वरूप प्रदान करने में उनकी भूमिका अहम रही। उन्होंने कहा कि आपरेशन ब्ल्यू स्टार के दौरान उन्होंने बेखौफ होकर वे सारे विचार प्रकाशित किए, जो माहौल के विपरीत थे। ऐसा लगने लगा था कि हिंदी पत्रकारिता पक्षपाती हो गई है। उन्होंने कहा कि उनके साथ मेरे नजदीकी संबंध रहे और उनके जाने से हिन्दी पत्रकारिता का एक स्तंभ ढह गया।&lt;br /&gt;दिल्ली विवि के हिंदी के विभागाध्यक्ष सुधीश पचौरी ने कहा कि प्रभाष जी का निधन हिंदी पत्रकारिता के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके रहने से ऐसा लगता था कि अगर कोई परेशानी आएगी, तो एक छाता हमारे ऊपर आकर तन जाएगा, लेकिन अब वो आभास छिन गया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-4785596073657786827?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/4785596073657786827/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_06.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/4785596073657786827'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/4785596073657786827'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_06.html' title='हिंदी पत्रकारिता के एक युग का खतिमा'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-7067162196208784920</id><published>2009-11-02T06:56:00.000-08:00</published><updated>2009-11-02T07:34:00.297-08:00</updated><title type='text'>ऐ ऐम यु ,कतल और बंद :खेल क्या है ?</title><content type='html'>अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एक बार फिर बंद हो जाने से मेरी तरह दुन्या भर में फैले  हुए क़दीम छात्र को जो दिली सदमा हुवा है वोह इस यूनिवर्सिटी से बेलोस मोहब्बत का मामूली इज्हार्य है-यूनिवर्सिटी पर अगर ज़रा सा भी आंच आजाएतो हमबेचैन होजाते है-वि सी ने जल्दबाजी में जो क़दम उठाया है उसकी चौतरफा मज़म्मत की जारही है-मोजुदा हंगामा आरई और यूनिवर्सिटी  को बंद करने की जो भी वजह हो उसकी ईमानदारी से जाँच ज़रूरी है -मगर छात्र के इल्जाम पर भी गौर   करने की ज़रूरत है-छात्र का कहना है के एक छात्र के कतल  के बाद इंतजामिया ने अपनी ज़िमदर५इ ठीक से नही निभाई-जिस की वजह से बज छात्र भड़क गए -मगर इस बार हालात ऐसे नही थे के यूनिवर्सिटी  बंद की जाती-यूनिवर्सिटी में हंगामा की जो भी वजह बताई जारही उस में केतनी सच्चाई है उस पर गौर करने के बजाए इस पहलु पर भी गौर करना चाइये के बार बार कतल की वारदात के पीछे की सच्चाई किया है-अगर हम इसी तरह उलझते रहे तो अपने असल मकसद से बहुत दूर हो जाएँगे -और दुश्मन हमारी नाकामी पर जशन मनाएँगे -उनिवेसिटी से मोहब्बत का दावा करने वाले हजरात को उसी खलूस से कम करने की ज़रूरत है जो इस उंवेर्सिटी के बानी सर &lt;span class=""&gt;स्येद a&lt;/span&gt;हमद खान में थी-&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-7067162196208784920?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/7067162196208784920/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_02.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7067162196208784920'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7067162196208784920'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post_02.html' title='ऐ ऐम यु ,कतल और बंद :खेल क्या है ?'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-6865782216697129764</id><published>2009-11-01T07:36:00.000-08:00</published><updated>2009-11-01T07:38:07.936-08:00</updated><title type='text'>ऐसे है भाई शाहरुख़</title><content type='html'>शाहरुख के आकर्षक व्यक्तित्व, मिलनसार स्वभाव और प्रभावी अभिनय की प्रशंसक सारी दुनिया है। उनकी फिल्में भी कहीं न कहीं उनके व्यक्तित्व को दर्शाती हैं। हिंदी सिनेमा के इस सुपरस्टार के व्यक्तित्व के और भी पहलू हैं जिन पर प्रकाश डाल रहे हैं मुश्ताक शेख। मुश्ताक ने शाहरुख पर दो पुस्तकें शाहरुख कैन और स्टिल रीडिंग खान लिखी हैं। इनमें उनके जीवन और कॅरियर को करीने से संकलित किया गया है।&lt;br /&gt;निजी जीवन में शाहरुख मेरी और आपकी तरह साधारण इंसान हैं। वह जब घर में होते हैं तो सारा समय आर्यन, सुहाना और गौरी को देते हैं। भारतीय मूल्यों, आदर्शो और संस्कारों में शाहरुख दिल से यकीन करते हैं और अपनी सभी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाते हैं। यही वजह है कि वे हमेशा खुश एवं संतुष्ट नजर आते हैं। उनका एक ही लक्ष्य है, जीवन के अंतिम समय तक काम करते रहना। वह मानते हैं कि इंसान की पहचान उसके काम से होती है। अपने काम से ही इंसान निरंतर आगे बढ़ता रहता है।&lt;br /&gt;शाहरुख भले ही उम्र की दहलीज पर दहलीज पार करते जा रहे हैं, लेकिन उनके अंदर आज भी दस साल का एक बच्चा है। उनकी इन्हीं खूबियों की बदौलत उनके चाहने वाले उनकी फिल्मों को पसंद करते हैं। आने वाले दिनों में शाहरुख की माई नेम इज खान, दूल्हा मिल गया, हैपी न्यू ईयर और रा 1 फिल्में उनके चेहेतों के बीच होंगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-6865782216697129764?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/6865782216697129764/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/6865782216697129764'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/6865782216697129764'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/11/blog-post.html' title='ऐसे है भाई शाहरुख़'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-6502379960015492245</id><published>2009-10-29T09:52:00.000-07:00</published><updated>2009-10-29T09:54:43.766-07:00</updated><title type='text'>अच्छी सेहत के लिए खुश रहना जरूरी</title><content type='html'>सारा आकाश और 'होटल किंग्स्टन' धारावाहिकों में केंद्रीय भूमिका निभा चुकी सोनल सहगल अब बड़े पर्दे की ओर रुख कर चुकी हैं। हिमेश रेशमिया अभिनीत 'रेडियो' से सोनल अपनी फिल्मी पारी की शुरुआत कर रही हैं। नागेश कुकनूर निर्देशित 'आशाएं' में भी वह जॉन अब्राहम के साथ काम कर रही है। इसके अलावा विवाहित सोनल 'जाने कहाँ से आयी है' और 'इश्क अनप्लग्ड' में भी अदाकारी दिखाएंगी। आइए जानते है सोनल की फिटनेस के राज-&lt;br /&gt;[स्वास्थ्य के प्रति जागरूक]&lt;br /&gt;'' मैं फुर्सत के लम्हों में सेहत पर सारा ध्यान केंद्रित करती हूं। सेहत को लेकर मैं जागरूक हूँ। नियमित रूप से व्यायाम करती हूँ। हर दिन जिम नहीं जा पाती। ज्यादातर घर पर ही व्यायाम करती हूँ। घर पर अधिकतर किक बॉक्सिंग करती हूँ। किक बॉक्सिंग ऐसा व्यायाम है,जो शरीर की प्रत्येक मांसपेशियों के लिए कारगर है। किक बॉक्सिंग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों से अवगत होने के बाद अब मैं स्वतंत्र रूप से इसे घर पर करने लगी हूँ। सुबह लगभग 30 मिनट तक योगासन करने के बाद अन्य व्यायाम करती हूँ। ''&lt;br /&gt;[तनाव आस-पास फटकने नहीं देती]&lt;br /&gt;''मैं मानती हूँ कि शारीरिक स्वास्थ्य आपके मानसिक स्वास्थ्य से प्रभावित होता है। स्वस्थ रहने केलिए जरूरी है कि आपका मन शांत रहे और आप प्रसन्न रहे। मैं खुश रहने की कोशिश करती हूँ। इस मामले में खुशनसीब हूँ कि पति और परिवार के सहयोग के कारण मैं अनावश्यक तनाव को अपने आस-पास फटकने नहीं देती। शारीरिक व्यायाम के अलावा इस बात पर ध्यान देती हूँ कि 8 घंटे की अपनी नींद पूरी कर सकूं। अच्छी सेहत के लिए नींद पूरी करना जरूरी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-6502379960015492245?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/6502379960015492245/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_29.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/6502379960015492245'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/6502379960015492245'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_29.html' title='अच्छी सेहत के लिए खुश रहना जरूरी'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-7735911244273269120</id><published>2009-10-28T07:27:00.000-07:00</published><updated>2009-10-28T07:30:12.248-07:00</updated><title type='text'>इंटरनेट पर दोस्ती अरे बाबा न बाबा</title><content type='html'>अगर आप इंटरनेट पर दोस्ती करने में यकीन रखते हैं तो जरा संभल जाइए, क्योंकि दिल बहलाने के लिए की जाने वाली यह दोस्ती एक दिन आपकी जान भी ले सकती है।&lt;br /&gt;ब्रिटेन में एक ऐसा ही वाकया सामने आया है। डरहम के डार्लिगटन में 32 साल के युवक ने लड़की के साथ इंटरनेट पर दोस्ती की और फिर उसे मिलने के लिए बुलाया। जब लड़की मिलने आई तो युवक ने उसका अपहरण करके हत्या कर दी।&lt;br /&gt;डेली मेल के अनुसार, लड़के ने फेसबुक पर उससे दोस्ती की और फिर गुप्त तौर पर मिलने के लिए उसे बुलाया। लड़की ने सोचा कि यह लड़का 16 साल का है और वह इसी लालच में उससे मिलने चली गई। अखबार के अनुसार, इस लड़के के खिलाफ पहले भी यौन अपराध के कई मामले दर्ज थे। यह वाकया कल आपके साथ भी हो सकता है। इसलिए इंटरनेट पर दोस्ती करने से बचें और बिना किसी जान-पहचान के किसी से न मिलें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-7735911244273269120?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/7735911244273269120/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_28.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7735911244273269120'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7735911244273269120'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_28.html' title='इंटरनेट पर दोस्ती अरे बाबा न बाबा'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-8186290507278660853</id><published>2009-10-26T07:49:00.000-07:00</published><updated>2009-10-26T08:09:38.795-07:00</updated><title type='text'>उफ़ ये महंगाई ...?</title><content type='html'>मुल्क में जानलेवा महंगाई दिन बदिन बढती जा रही है -आदमी एक परेशनी से ओभर नही पता के दोसरी सामने  आजाती है-ये खोफ लोक सभ्हा चुनाव के वक्त ही महसूस किया गया था की चुनाव के बाद सरकार महंगाई की मर से लोगों को बचा नही सकेगी-और  यही हुवा जिस का खतरा था -दिल्ली की हकुमत हो या सेन्ट्रल ,किसी को भी आम लोगों की फिकर नही है-यही वजह है के खाने पिने की चीज़ से लेकर हर वोह सामान जो जिन्दा रहने के लिए ज़रूरी है सरकार महंगी करती जा रही है-आम आदमी को इस कमर तोड़ महंगाई से कैसे बचाया जाए उसकी फिकर किसी को भी नही है -आज राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली परिवहन निगम [डीटीसी] और ब्लू लाइन में सफर करने वालों के लिए एक और परेशानी में उस वक़्त और इजाफा होगया जब दिल्ली सरकार ने बस भाड़े में डेढ़गुना इजाफा करदिया -दिल्ली सरकार ने राजस्व में कमी की भरपाई के लिए बसों के भाड़े में बढ़ोतरी का निर्णय किया है।&lt;br /&gt;यात्रियों ने बस भाड़े में बढ़ोतरी पर नाराजगी जताई है। वे पहले से ही खाद्य वस्तुओं की बढ़ी हुई कीमत और नरमी से प्रभावित हैं। दूरसंचार कंपनी में विपणन अधिकारी सौरभ गुलाटी ने कहा कि अगले कुछ साल में कोई चुनाव नहीं होने हैं, इसीलिए उन्होंने भाड़े में बढ़ोतरी की है। किराए में बढ़ोतरी से उन पर वित्तीय पड़ेगा। कनाट प्लेस स्थित निजी कंपनी में चपरासी शंकर दास के लिए बस भाड़े में बढ़ोतरी अचंभित करने वाला है।&lt;br /&gt;शहर के लक्ष्मी नगर इलाके में रहने वाले दास ने कहा कि मुझे 250 रुपये और खर्च करने होंगे। मेरे दो बच्चे हैं, और मुझे नहीं पता कि अपने परिवार का पालन कैसे करूंगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-8186290507278660853?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/8186290507278660853/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_3923.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/8186290507278660853'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/8186290507278660853'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_3923.html' title='उफ़ ये महंगाई ...?'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-7705985234493915795</id><published>2009-10-26T07:33:00.000-07:00</published><updated>2009-10-26T07:42:24.177-07:00</updated><title type='text'>दो गज ज़मीं ना मिल सकी ...</title><content type='html'>किसी भी देश के इतिहास में बहादुर शाह जफर जैसे कम ही शासक होते हैं जो अपने देश को महबूबा की तरह मुहब्बत करते हैं और जीवन भर देशप्रेम में डूबे रहने के बाद 'कू ए यार' में जगह न मिल पाने की कसक के साथ परदेस में दम तोड़ देते हैं। &lt;br /&gt;बादशाह जफर ने जब रंगून में कारावास के दौरान अपनी आखिरी सांस ली तो शायद उनके लबों पर अपनी ही मशहूर गजल का यह शेर अवश्य रहा होगा 'कितना है बदनसीब जफर दफ्न के लिए, दो गज जमीन भी न मिली कू ए यार में।' &lt;br /&gt;भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर उर्दू के एक बड़े शायर के रूप में भी विख्यात हैं। उनकी शायरी भावुक कवि के बजाय देशभक्ति के जोश से भरी रहती थी और यही कारण था कि उन्होंने अंग्रेज शासकों को 'तख्ते लंदन तक हिन्दुस्तान की शमशीर [तलवार] चलने की' चेतावनी दी थी। जनश्रुतियों के अनुसार प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद जब बादशाह जफर को गिरफ्तार किया गया तो उर्दू जानने वाले एक अंग्रेज सैन्य अधिकारी ने उन पर कटाक्ष करते हुए यह शेर कहा, 'दमदमे में दम नहीं खैर मांगो जान की, बस हो चुकी जफर शमशीर हिंदुस्तान की।' इस पर जफर ने करारा जवाब देते हुए कहा था, 'गाजियों में जब तलक बू रहेगी ईमान की, तख्ते लंदन तक चलेगी शमशीर हिन्दुस्तान की।' &lt;br /&gt;भारत में मुगलकाल के अंतिम बादशाह कहे जाने वाले जफर को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दिल्ली का बादशाह बनाया गया था। बादशाह बनते ही उन्होंने जो चंद आदेश दिए उनमें से एक था गोहत्या पर रोक लगाना। इस आदेश से पता चलता है कि वे हिन्दू मुस्लिम एकता के कितने बड़े पक्षधर थे। 1857 के समय बहादुर शाह जफर एक ऐसी बड़ी हस्ती थे जिनका बादशाह के तौर पर ही नहीं एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति के रूप में भी सभी सम्मान करते थे। इसीलिए बेहद स्वाभाविक था कि मेरठ से विद्रोह कर जो सैनिक दिल्ली पहुंचे उन्होंने सबसे पहले बहादुर शाह जफर को अपना बादशाह बनाया। &lt;br /&gt;चतुर्वेदी ने बातचीत में कहा कि जफर को बादशाह बनाना सांकेतिक रूप से ब्रिटिश शासकों को एक संदेश था। इसके तहत भारतीय सैनिक यह संदेश देना चाहते थे कि भारत के केंद्र दिल्ली में विदेशी नहीं बल्कि भारतीय शासक की सत्ता चलेगी। उन्होंने कहा कि बादशाह बनने के बाद बहादुर शाह जफर ने गोहत्या पर पाबंदी का जो आदेश दिया था वह कोई नया आदेश नहीं था। अकबर ने अपने शासनकाल में इसी तरह का आदेश दे रखा था। जफर ने महज इस आदेश का पालन फिर से करवाना शुरू कर दिया था। &lt;br /&gt;देशप्रेम के साथ-साथ जफर के व्यक्तित्व का एक अन्य पहलू शायरी थी। उन्होंने न केवल गालिब, दाग, मोमिन और जौक जैसे उर्दू के बड़े शायरों को तमाम तरह से प्रोत्साहन दिया बल्कि वह स्वयं एक अच्छे शायर थे। साहित्य समीक्षकों के अनुसार जफर के समय में जहां मुगलकालीन सत्ता चरमरा रही थी वहीं उर्दू साहित्य खासकर उर्दू शायरी अपनी बुलंदियों पर थी। &lt;br /&gt;जफर की मृत्यु के बाद उनकी शायरी कुल्लियात ए जफर के नाम से संकलित की गई। जफर का जन्म 24 अक्टूबर 1775 में हुआ था। उनके पिता अकबर शाह द्वितीय और मां लालबाई थीं। अपने पिता की मृत्यु के बाद जफर को 18 सितंबर 1837 में मुगल बादशाह बनाया गया। यह दीगर बात थी कि उस समय तक दिल्ली की सल्तनत बेहद कमजोर हो गई थी और मुगल बादशाह नाम मात्र का सम्राट रह गया था। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की जफर को भारी कीमत भी चुकानी पड़ी थी। उनके पुत्रों और प्रपौत्रों को ब्रिटिश अधिकारियों ने सरेआम गोलियों से भून डाला। यही नहीं उन्हें बंदी बनाकर रंगून ले जाया गया जहां उन्होंने सात नवंबर 1862 में एक बंदी के रूप में अपना दम तोड़ा और उन्हें वहीं दफनाया गया। आज भी कोई देशप्रेमी व्यक्ति जब तत्कालीन बर्मा [म्यामां] की यात्रा करता है तो वह जफर की मजार पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि व्यक्त करना नहीं भूलता। &lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-7705985234493915795?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/7705985234493915795/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_26.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7705985234493915795'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7705985234493915795'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_26.html' title='दो गज ज़मीं ना मिल सकी ...'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-7775740553077028996</id><published>2009-10-21T05:46:00.000-07:00</published><updated>2009-10-21T05:58:10.339-07:00</updated><title type='text'>नन्हे-मुन्नों के लये टीवी देखना  मुज़िर</title><content type='html'>2साल से छोटे बच्चों के टीवी देखने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए क्योंकि इससे उनके विकास पर असर पड़ता है। यह कहना है ऑस्ट्रेलियाई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए प्रथम आधिकारिक दिशा निर्देशों के अनुसार कई घंटों तक टीवी के सामने यूं ही बैठे रहने से बच्चों के सामाजिक मेल-मिलाप एवं किसी विषय पर ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक दो साल से कम आयु के बच्चों के टीवी देखने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा देना चाहिए, जबकि दो से पांच साल तक के बच्चों के लिए टीवी देखने का अधिकतम समय दिन में एक घंटा निर्धारित कर देना चाहिए। ये दिशा-निर्देश मोटापा रोकने के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है। ये दिशा निर्देश अगले वर्ष से लागू हो जाएंगे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेलबोर्न के रॉयल चिल्ड्रन्स अस्पताल द्वारा तैयार उपरोक्त दिशा-निर्देश मुख्यत: चाइल्ड केयर सेंटर्स के लिए है। यद्यपि अभिभावकों को भी यह सलाह दी गई है कि घर पर भी वे अपने बच्चों को कम से कम टीवी देखने दें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चे ज्यादा टीवी देखते है, तो उनके खेलने-कूदने, अन्य लोगों से बातचीत करने और बोलना सीखने के लिए समय कम बचता है। वहीं टीवी पर आंखें गड़ाए रहने से आंखों के मूवमेंट पर भी असर पड़ता है। बच्चों के विकास के लिए उन्हे एक्टिव रखना जरूरी है। बच्चों से आमने-सामने बातचीत करने एवं उनके साथ खेलने से उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर ढंग से होता है। रिपोर्ट के अनुसार जब बच्चा एक साल का हो जाए तो उसे कम से कम रोजाना तीन घंटे एक्टिव रखना चाहिए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-7775740553077028996?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/7775740553077028996/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_21.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7775740553077028996'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7775740553077028996'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_21.html' title='नन्हे-मुन्नों के लये टीवी देखना  मुज़िर'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-2884659358203977456</id><published>2009-10-18T06:53:00.000-07:00</published><updated>2009-10-18T06:59:34.783-07:00</updated><title type='text'>जहाँ लगती है आदमी की बोली</title><content type='html'>केंद्र सरकार द्वारा जारी नेशनल सैम्पल सर्वे आर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक अब भी ग्रामीण आबादी का पांचवां हिस्सा मात्र 12 रुपये रोजाना में जीवन जीने को अभिशप्त है। ग्रामीणों की आय का आधा से ज्यादा हिस्सा यानी एक रुपये में 35 पैसे भोजन जुटाने में खर्च हो जाते हैं। इन तथ्यों के आइने में जब उत्तर बिहार में गरीबी उन्मूलन की दिशा में हुए सरकारी प्रयासों की बात करते हैं तो रूह कांप उठती है। यहां के शहरों में हर सुबह मजदूरों की बोली लगती है। &lt;br /&gt;अर्थशास्त्री डा. अम‌र्त्य सेन की बात यहां पूरी तरह सच दिखती है, जिसमें उन्होंने कहा है कि समस्या उत्पादन की नहीं, बल्कि समान वितरण की है।&lt;br /&gt;बिहार ke मुजफ्फरपुर शहर के चौराहे हर सुबह गुलजार हो जाते हैं मजदूरों और ठेकेदारों से। अलस्सुबह गांव से आए हजारों मजदूरों की यहां बोली लगती है। इनके अपने-अपने ठिकाने हैं। ज्यों-ज्यों सूरज आसमान चढ़ता है, इनकी कीमत कम होती जाती है। &lt;br /&gt;पश्चिमी चंपारण के बेतिया शहर में यह नजारा लालटेन चौक, इमली चौक, छावनी चौक, राज ड्योढी तथा हरिवाटिका चौक पर देखी जा सकती है। मजदूरों में अधिकतर मजदूरी नहीं मिलने के कारण घर लौट जाते हैं। बगहा में सरकार हर वर्ष अक्टूबर में निर्धनता उन्मूलन दिवस मनाती है। बावजूद गरीबी के कारण पलायन जारी है। &lt;br /&gt;मोतिहारी के छतौनी, ज्ञानबाबू चौक, बलुआ चौक व चांदमारी चौक पर सुबह आठ से दस बजे तक नजारा देखने लायक होता है। यहां मजदूर माल की तरह बिकते हैं। 100 से 120 रुपये की मजदूरी पर ये कोई भी काम करने को तैयार हो जाते हैं।  कई बार तो इन्हें पूरी मजदूरी भी नहीं दी जाती। डर होता है कि कहीं अगले दिन भाग न जाएं। दरभंगा के गांवों से अलस्सुबह चलकर यहां मजदूर काम की तलाश में पहुंचते हैं। शहर के एक कोने में आकर बैठ जाते हैं। लोग आते हैं, बोली लगाते हैं और खरीदकर इन्हें ले जाते हैं। यह अमानवीय दृश्य पाली राम चौक, कटहलबाड़ी गुमटी व महाराजी पुल के पास आसानी से देखा जा सकता है। जिनको काम मिल जाता है, वे खुद को खुशनसीब समझते हैं, वर्ना निराश होकर गांव लौट जाते हैं। &lt;br /&gt;फिर दूसरे दिन अलस्सुबह चौराहों पर आकर खड़े हो जाते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-2884659358203977456?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/2884659358203977456/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_18.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/2884659358203977456'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/2884659358203977456'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_18.html' title='जहाँ लगती है आदमी की बोली'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-7626670479130106998</id><published>2009-10-16T23:48:00.001-07:00</published><updated>2009-10-17T00:22:34.814-07:00</updated><title type='text'>मिशन सर सय्यद अहमद खान</title><content type='html'>इस अजीम इन्सान की पैदाइश १७,ओक्तुबेर १८१७ में दिल्ली के एक मोअजिज़ घराने में हुई  -उनके पिता सय्यद मुत्तकी भी एक सोफी बुजुर्ग थे-उन्होंने अलग अलग उलमा से अरबी ,फारसी औरहिकमत की तालीम हासिल की-मोलवी खालिलुल्लाह से कानून की तालीम ली और उन्ही के दफ्तर में मोलाज्मत करली-तरक्की कर के कमिशनर के यहाँ मुंशी मोक़रार &lt;span class=""&gt;हुए-1&lt;/span&gt;८५७के इंक़लाब के वकत सर सय्यद अहमद खान जिला बिजनोर में ही थे-इस इन्कलाब को अंग्रेजों ने बगावत का नाम दिया था और उसका जिम्मदार मुसलमानों को ठहराया -यही वजह थी के अंग्रेजों ने मुसलमानों के घरों को तबाह व बर्बाद करना शुरू करदिया  -इसी  दौरान उनका तबादला मुरादाबाद होगया -जहाँ मुसलमानों पर सब से ज़यादा ज़ुल्म ढाया गया -सर सय्यद  अहमद खान ने उन मजलूमों की जन &lt;span class=""&gt;बचे &lt;/span&gt;इस सिलसिले में उन्होंने एक किताब ,असबाब  बगावत ऐ हिंद ,लिखी -जिस में बगावत के असल असबाब बयां किए गए थे-१८५७ के बाद मोगल हकुमत जो सिर्फ़ लालकिला तक रहगई थी ख़तम होगई-अँगरेज़ पुरे मुल्क पर काबिज़ होगे और मुल्क के हालात बहुत तेज़ी से बदलने लगे-समाज में ज़िन्दगी गुजारने और हकूमत तक रसाई के लिए ज़माने के हिसाब से अंग्रेज़ी और जदीद  तालीम हासिल करना ज़रूरी होगया-उस &lt;span class=""&gt;वक्त m&lt;/span&gt;उसलामं अंग्रजी तालीम हासिल करने से कतरा रहे थे-मगर सर सय्यद ने मोस्लामानो को इस तरफ़म मोतावाजा  कराने के लिए अमली कोशिश की-इसी गरज&lt;span class=""&gt;   से १८७५ &lt;/span&gt;में अलीगढ में मोहम्दन कोलेज की बुन्याद डाली जो आज अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की शकल में मौजूद है-&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-7626670479130106998?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/7626670479130106998/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_6680.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7626670479130106998'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7626670479130106998'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_6680.html' title='मिशन सर सय्यद अहमद खान'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-1391519967483114007</id><published>2009-10-14T07:19:00.001-07:00</published><updated>2009-10-14T07:23:55.013-07:00</updated><title type='text'>भरपेट भोजन व शिक्षा के मोहताज बच्चे</title><content type='html'>तरक्की के तमाम दावों और दुनिया की उम्मीदों का केंद्र बनने के बावजूद भारत में नवजात शिशुओं और बच्चों की कुपोषण से मौत के आकड़े उसका सिर शर्म से नीचा कर रहे है।&lt;br /&gt;अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसी 'सेव द चिल्ड्रन' के सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में हर साल पैदा होने वाले बच्चों में से आधे शिशुओं की पैदा होते ही मृत्यु हो जाती है। इस सर्वेक्षण पर भरोसा करें तो आठ से दस प्रतिशत सालाना स्थिर आर्थिक वृद्धि का सपना देख रहे भारत में 20 लाख बच्चे तो हर साल अपना पाचवा जन्मदिन मनाने से पहले ही भूख से होने वाले कुपोषण और उसके कारण लगने वाली बीमारियों से दम तोड़ देते हैं।&lt;br /&gt;दुनिया में कुपोषण का शिकार हर तीसरा बच्चा भारत में रहता है और हर पंद्रहवें सेकेंड में एक बच्चा मौत की नींद सो जाता है।&lt;br /&gt;शिक्षा के लिहाज से तो इन नन्हे बच्चों की और दुर्गति है। गावों में पढ़ने को स्कूल नहीं हैं और जहा स्कूल हैं, वहा कहीं इमारत नदारद है तो कहीं शिक्षकों का अता-पता नहीं है। गनीमत है कि इस मामले में भारत न तो अकेला है और न ही अग्रणी देशों में है। दुनिया के जिन 75 लाख बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मयस्सर नहीं है, उनमें उस अमेरिका के बच्चे भी शामिल हैं, जिसे तीसरी दुनिया के देश, विकास की मिसाल मानते हैं और उसके नक्श-ए-कदम पर चलने को आतुर रहते हैं।&lt;br /&gt;अमेरिका में ढाई लाख बच्चे प्राथमिक शिक्षा के बाद पढ़ाई पूरी नहीं करते। यह खुलासा भी 'सेव द चिल्ड्रन' की माताओं की भूमिका पर जारी एक और रिपोर्ट में हुआ है। इसके अनुसार, दुनिया में ऐसे बेहिसाब बच्चे हैं, जो या तो समय से पहले स्कूल छोड़ देते हैं या उन्हें पढ़ने का मौका ही नहीं मिल पाता।&lt;br /&gt;संगठन का मानना है कि बच्चों के ये बुनियादी वर्ष किसी भी देश में खुशहाली लाने का जरिया बन सकते हैं और यह तभी हो सकता है, जब बच्चों को मुकम्मल परवरिश, स्वस्थ पारिवारिक जीवन और सेहतमंद मा मिले।&lt;br /&gt;दरअसल, बच्चे का छुटपन विशेषरूप से पहले पाच साल सबसे अहम होते हैं। यही वह समय है, जिसमें उसमें जीवन में विकास के बीज पड़ते हैं। वह इस दौरान जो सीखता-समझता है, उसी पर उसके जीवन की बुनियाद टिकी होती है। लिहाजा, यदि इस दौरान बच्चों को अच्छा जीवन न मिले, उनकी सही देखभाल न हो और पढ़ाई का मौका न मिले तो वह ताजिंदगी इसका खामियाजा उठाता रहता है।&lt;br /&gt;'सेव द चिल्ड्रन' बच्चों को उम्र के पाचवे साल तक भरपूर पोषण, सुरक्षित जीवन और पढ़ाई इत्यदि के मौके दिलाने की दिशा में प्रयासरत है। इस संगठन ने दुनिया के 100 विकासशील देशों और अमेरिका के पाच राज्यों में बच्चों की स्थिति पर एक मार्गदर्शिका तैयार की है।&lt;br /&gt;इसमें यह बताया गया है कि संबद्ध देश और राच्य अपने नौनिहालों को स्कूल में सफलता के लिए कैसे तैयार करते हैं। इसके विश्लेषण के लिए इन देशों के आर्थिक आकड़ों की भी जाच की गई है।&lt;br /&gt;बच्चों के विकास के लिए चल रहे प्रयास और आर्थिक आकड़ों के विश्लेषण के बाद निकले नतीजों से यह पहचाना जा सकता है कि जिन देशों ने बच्चों के लिए निवेश किए, उन्हें मौके दिए, उन देशों में बच्चों की विकास की प्रवृत्ति दिखने लगी है।&lt;br /&gt;रिपोर्ट में उन सभी उपकरणों और संसाधनों का भी जिक्र है, जो किसी बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और शिक्षा के लिए जरूरी माहौल सुनिश्चित करते हैं। इसके साथ यह भी बताया गया है कि जिन लोगों को इनकी सबसे ज्यादा जरूरत है, उन तक वह पहुंच नहीं पाते।&lt;br /&gt;किसी भी देश में बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा और स्कूल में उनकी सफलता में देश का कल्याण निहित है। दुनिया की आर्थिक खुशहाली का राज भी इन नौनिहालों की खुशी में छुपा है। यह एक मनोवैज्ञानिक सच्चाई तो है ही, लेकिन पूरी दुनिया में इस पर जो शोध हुए हैं, उससे भी यह साबित हो गया है कि कोई भी बच्चा स्कूल में तभी सफल होता है, जब उसे सीखने के लिए बढि़या माहौल मिले।&lt;br /&gt;दुनिया में समाज की आमदनी बढ़ाने और लागत घटाने का भी यह सबसे अहम नुस्खा है। माना कि अमेरिका एक अमीर कद्दावर देश है, फिर भी वहा के बच्चे स्कूलों में बहुत अच्छा नहीं कर रहे हैं। इसकी वजह यही बताई जा रही है कि इन बच्चों को जरूरी पारिवारिक सुरक्षा नहीं मिल रही है।&lt;br /&gt;मैक्सिको, नेवादा, मिसीसिपी, एरीजोना और अलबामा यह पाच अमेरिकी राच्य बच्चों की पढ़ाई में कम दिलचस्पी के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। यहा बच्चों के विकास में अड़चन का सबसे अहम कारण अभिभावकों की भागीदारी का न होना है। उनके घर का माहौल पढ़ाई-लिखाई के माकूल नहीं है।&lt;br /&gt;अमेरिका में पढ़ाई में गिरावट 1999 के आसपास आनी शुरू हुई। 1995 तक यह देश बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में अग्रणी था। वर्ष 2000 में स्थिति बिगड़नी शुरू हुई और यह आठवें पायदान पर पहुंच गया। 2006 में यह घटकर 14वें क्रम में आ गया। वहा कालेज छोड़ने वाले बच्चों की संख्या अचानक बढ़ने लगी है।&lt;br /&gt;फिलहाल दुनिया के 24 औद्योगिक देशों के बीच शिक्षा के मामले में अमेरिका 18वें पायदान पर है। वहा के 53 फीसदी नौजवान बीच में ही कालेज की पढ़ाई छोड़ रहे हैं।&lt;br /&gt;दरअसल, विकासशील देशों में पाच वर्ष तक के 40 फीसदी बच्चे बेहद गरीबी में जी रहे हैं। उनकी सेहत का खयाल रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उन्हें भरपेट पौष्टिक भोजन भी नहीं मिल रहा है। यही वजह है कि उनकी क्षमता पूरी तरह पल्लवित नहीं हो रही है, न ही देश के विकास में उनकी भागीदारी का उपयोग हो रहा है। सेव द चिल्ड्रन के अनुसार, किसी देश के खुशहाल भविष्य की यह अहम शर्त है।&lt;br /&gt;चार्ड, बुरूंडी, अफगानिस्तान, गीनिया, बिसाऊ और माली दुनिया के ऐसे देश हैं, जहा बच्चों को ठीक-ठाक प्राथमिक शिक्षा भी नहीं मिल पा रही है। बुरूंडी में पाच वर्ष तक की उम्र के 25 फीसदी बच्चे स्कूल नहीं जाते। माली में 37 फीसदी और चार्ड में 40 फीसदी बच्चों को स्कूल का मुंह देखना नसीब नहीं हो पाता और गीनिया बिसाउ में 55 फीसदी बच्चे नहीं जानते कि पढ़ाई क्या होती है। इसकी वजह इन देशों के गरीबी है। यहा ऐसी सार्वजनिक सेवाओं का गंभीर अभाव है, जो इन बच्चों की सेहत का खयाल रख सके। समस्याओं और संघर्ष से जूझ रहे इन देशों के माहौल ने इन बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया है और इसका असर इनके जीवन पर तो पड़ ही रहा है, इससे देश का भविष्य भी चौपट होता लग रहा है।&lt;br /&gt;उधर क्यूबा, आर्मीनिया, साइप्रस, चिली और अजरबैजान ये पाच देश अपने बच्चों को बेहतर माहौल देने के लिए जाने जाते हैं। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पारिवारिक जीवन की बदौलत यहा के बच्चे स्कूलों में बढि़या पढ़ाई कर रहे हैं। 'सेव द चिल्ड्रन' ने अपनी रिपोर्ट में बच्चों के विकास में मा की अहम भूमिका का भी जिक्र किया है।&lt;br /&gt;उसका मानना है कि भविष्य में मानवता की रक्षा का सूत्र मा के हाथ में है। मा ही बच्चे की पहली शिक्षक है, जो उसे स्कूल से लेकर समाज और देश तक में अपने अस्तित्व के लिए तैयार करती है। वह उसके पहले पाच साल में उसके व्यक्तित्व में उन सारे गुणों का समावेश करती है, जो दुनिया में उसके जीवन और संघर्ष इत्यदि से जूझने के लिए जरूरी है, लेकिन सफलता का यह सूत्र अकेले ही बच्चों को आगे नहीं बढ़ा सकता। इसके लिए किसी भी देश में राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है।&lt;br /&gt;राजनीतिक इच्छाशक्तिके इस नुस्खे में मा-बच्चे की सेहत सबसे अहम पहलू है। इसकी शुरुआत गर्भ धारण के साथ ही हो जानी चाहिए। गर्भवती स्त्री को जब तक उसके स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा की गारटी न मिले, वह स्वस्थ संतान को कैसे जन्म दे पाएगी। लिहाजा, उसके लिए सभी तरह के संक्रमण से बचाव का इंतजाम बहुत जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान उसकी कठिनाइयों की भरपूर निगरानी हो और बच्चे को जन्म देने के पहले और उसके बाद जच्चा-बच्चा का ख्याल तो जरूरी है ही। बच्चों की सेहत का ख्याल पूरे घर को रखना है। लिहाजा, घर के सदस्यों को बच्चों से जुड़ी छोटी-मोटी बातों का भी पता है, यह सुनिश्चित करना राजनीतिक इच्छाशक्ति का ही हिस्सा है।&lt;br /&gt;विकासशील और औद्योगिक देशों में ऐसे बेहिसाब कार्यक्रम हैं, जो बच्चों के चौतरफा विकास के लिए जरूरी बातों का प्रशिक्षण देते हैं। वे बच्चों की देखभाल के साथ ही उन्हें बच्चों से कुकर्म और उनकी उपेक्षा जैसी बातों का मर्म बताते हैं। इन देशों में एड्स, सुनामी जैसी प्राकृतिक विपदाओं और श्रीलंका, अफगानिस्तान जैसे संघर्ष से जूझ रहे देश के बच्चों के लिए विशेष कार्यक्त्रम हैं। अमेरिका भी 'सबके लिए शिक्षा' नाम से कार्यक्रम चलाता है।&lt;br /&gt;कल्याणकारी कार्यक्रमों से बच्चों की शिक्षा निश्चित तौर पर प्रभावित होती है। दिल्ली में चल रहे एक कार्यक्रम की बदौलत संबद्ध इलाके के बच्चे पढ़ाई की तरफ प्रवृत्त हुए हैं। इन इलाकों में लड़कियों की पढ़ाई में 7.7 और लड़कों की पढ़ाई में 3.2 का इजाफा हुआ है। इसी तरह स्कूल में आगे पढ़ने वाले छात्र भी बढ़े हैं। हमारे पड़ोसी देशों में श्रीलंका को छोड़कर बाकी देशों में प्राथमिक शिक्षा का दृश्य बहुत बढि़या नहीं है। भूटान में 20 फीसदी बच्चे प्राथमिक शिक्षा नहीं लेते हैं। नेपाल में 24 फीसदी और पाकिस्तान में 34 फीसदी बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। श्रीलंका में प्राथमिक शिक्षा लेने वाले बच्चों की तादाद 90 फीसदी है। वहा सिर्फ तीन फीसदी बच्चे स्कूल नहीं जाते और एक फीसदी बच्चों के फेल होने यानी एक ही कक्षा में दोबारा पढ़ने की नौबत आती है। वहा 93 फीसदी बच्चे पाचवीं तक की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं।&lt;br /&gt;'सेव द चिल्ड्रन' की पहलकदमी से कुछ देशों ने शिक्षा में परिवार और माहौल की भागीदारी के महत्व को समझ लिया है। संगठन की छत्रछाया में पूरी दुनिया में बच्चों और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हो रही है और उसी हिसाब से शिक्षा के अवसर देने के लिए प्रयत्न चल रहे हैं। बच्चों के विकास में मा की भूमिका को रेखाकित किया जा रहा है। लिहाजा माताओं की शिक्षा और उनके स्वास्थ्य के लिए भी इंतजाम हो रहे हैं। भारत में नन्हें बच्चों की प्राथमिक शिक्षा और उसके इर्द-गिर्द के प्रयासों पर 'सेव द चिल्ड्रन' कार्यक्रम में कोई खास जिक्र नहीं मिलता, पर बिहार में कोसी के कहर के बाद बेघर हुए बच्चों के लिए उसके शिक्षा के जो प्रयास चल रहे हैं, उनकी भी अनदेखी नहीं हो सकती। बहरहाल, बच्चों के बचाव और विकास की बुनियाद पर देश के सामाजिक, आर्थिक विकास का सपना बुनने वाली यह संस्था अपने प्रयासों में असर दिखाने लगी है।&lt;br /&gt;पर पता नहीं उसे मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के स्कूलों की खबर है या नहीं। इतंजार बस यही है कि दुनिया का हर बच्चा कब भरपेट भोजन और भरपूर पढ़ाई कर पाएगा?&lt;br /&gt;इन पर करो अमल, देखो फिर असर&lt;br /&gt;अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसी 'सेव द चिल्ड्रन' के एक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष पांच साल से कम उम्र के लगभग बीस लाख बच्चों की मौत होती है। यह संख्या दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले अधिक है। पाच वर्ष से कम आयु में मृत्यु की दर को 2010 से 2015 के बीच आधा करने के लिए सेव द चिल्ड्रन मिलेनियम डेवलपमेंट गोल-4 लेकर आई है। इसके तहत संस्था ने एक सात-सूत्रीय कार्यक्त्रम पेश किया है और विशेष रूप से भारत का ध्यान इन सात क्षेत्रों की ओर आकर्षित किया है।&lt;br /&gt;भारत से कहा गया है कि वह विश्वसनीय राष्ट्रीय योजना लागू करे। इसके तहत भारत 2011 तक मां, नवजात शिशु और शिशु बचाव संबंधी विशेष योजना पर अमल शुरू कर देगा, जिस पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, महिला और शिशु उत्थान, जल और शौच, नागरिक विकास मंत्रालय और नरेगा काम करेगा-&lt;br /&gt;नवजात शिशु पर फोकस:&lt;br /&gt;पचास प्रतिशत नवजात शिशु पहले महीने के अंदर ही मौत के शिकार हो जाते हैं। इसके लिए उनके जीवित रहने के उपायों पर विशेष जोर दिए जाने की सलाह दी गई है। चूंकि भारत में दो तिहाई प्रसव घरों में होते हैं, इसलिए नवजात शिशु की जरूरी देखभाल घर के साथ-साथ अस्पताल और स्वास्थ केंद्रों में उपलब्ध कराई जाए।&lt;br /&gt;नवजात की देख रेख:&lt;br /&gt;इसे प्राथमिकता दी जाए। इसमें मां, नवजात बच्चे के स्वास्थ, पोषण और अन्य संबंधित चीजों के बीच की दूरी को कम किया जाना शामिल है। इसके अलावा अमीर और गरीब विशेषरूप से अधिकारहीन वर्ग के बच्चों की मृत्यु दर के बीच की दूरी को कम करना भी शामिल है। अतिरिक्त संसाधन जुटाना: भारत को चाहिए कि 2015 तक स्वास्थ पर खर्च की जाने वाली जीडीपी की एक प्रतिशत रकम को बढ़ा कर पाच प्रतिशत करे, जो अंतरराष्ट्रीय औसत है। बच्चे के स्वास्थ्य, पोषण, पीने के पानी, स्वास्थ, विद्या, आजीविका और खाद्य सुरक्षा स्कीमों पर ख़र्च की जाने वीली रकम को दोगुना करे।&lt;br /&gt;स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों को प्रशिक्षण-अतिरिक्त दिए गए पैसों में से कुछ हिस्सा हेल्थकेयर कर्मचारियों की भर्ती, प्रशिक्षण, उन्हें सामान देने और तैनात करने में खर्च किया जाए। भारत में प्रशिक्षित और उपकणों से लैस हेल्थकेयर कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि का लक्ष्य बनाया जाए। विशेष तौर पर सबसे ज्यादा गरीब और अधिकारहीन वर्गो की जरूरतों को पूरा करने के लिए।&lt;br /&gt;कुपोषण पर काबू करें:&lt;br /&gt;पोषण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पुष्टिकर अनुपूरक, विशेष स्तनपान कराने, पूरक खुराक और खाद्य किलाबंदी के साथ-साथ प्रमाणित बचाव के उपायों को अपनाया जाए। इसके अलावा कैश ट्रांसफर और सामाजिक सुरक्षा के कार्यक्रमों को सहायता प्रदान की जानी चाहिए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-1391519967483114007?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/1391519967483114007/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_14.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/1391519967483114007'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/1391519967483114007'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_14.html' title='भरपेट भोजन व शिक्षा के मोहताज बच्चे'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' 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हैं।&lt;br /&gt;दुनिया में कुपोषण का शिकार हर तीसरा बच्चा भारत में रहता है और हर पंद्रहवें सेकेंड में एक बच्चा मौत की नींद सो जाता है।&lt;br /&gt;शिक्षा के लिहाज से तो इन नन्हे बच्चों की और दुर्गति है। गावों में पढ़ने को स्कूल नहीं हैं और जहा स्कूल हैं, वहा कहीं इमारत नदारद है तो कहीं शिक्षकों का अता-पता नहीं है। गनीमत है कि इस मामले में भारत न तो अकेला है और न ही अग्रणी देशों में है। दुनिया के जिन 75 लाख बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मयस्सर नहीं है, उनमें उस अमेरिका के बच्चे भी शामिल हैं, जिसे तीसरी दुनिया के देश, विकास की मिसाल मानते हैं और उसके नक्श-ए-कदम पर चलने को आतुर रहते हैं।&lt;br /&gt;अमेरिका में ढाई लाख बच्चे प्राथमिक शिक्षा के बाद पढ़ाई पूरी नहीं करते। यह खुलासा भी 'सेव द चिल्ड्रन' की माताओं की भूमिका पर जारी एक और रिपोर्ट में हुआ है। इसके अनुसार, दुनिया में ऐसे बेहिसाब बच्चे हैं, जो या तो समय से पहले स्कूल छोड़ देते हैं या उन्हें पढ़ने का मौका ही नहीं मिल पाता।&lt;br /&gt;संगठन का मानना है कि बच्चों के ये बुनियादी वर्ष किसी भी देश में खुशहाली लाने का जरिया बन सकते हैं और यह तभी हो सकता है, जब बच्चों को मुकम्मल परवरिश, स्वस्थ पारिवारिक जीवन और सेहतमंद मा मिले।&lt;br /&gt;दरअसल, बच्चे का छुटपन विशेषरूप से पहले पाच साल सबसे अहम होते हैं। यही वह समय है, जिसमें उसमें जीवन में विकास के बीज पड़ते हैं। वह इस दौरान जो सीखता-समझता है, उसी पर उसके जीवन की बुनियाद टिकी होती है। लिहाजा, यदि इस दौरान बच्चों को अच्छा जीवन न मिले, उनकी सही देखभाल न हो और पढ़ाई का मौका न मिले तो वह ताजिंदगी इसका खामियाजा उठाता रहता है।&lt;br /&gt;'सेव द चिल्ड्रन' बच्चों को उम्र के पाचवे साल तक भरपूर पोषण, सुरक्षित जीवन और पढ़ाई इत्यदि के मौके दिलाने की दिशा में प्रयासरत है। इस संगठन ने दुनिया के 100 विकासशील देशों और अमेरिका के पाच राज्यों में बच्चों की स्थिति पर एक मार्गदर्शिका तैयार की है।&lt;br /&gt;इसमें यह बताया गया है कि संबद्ध देश और राच्य अपने नौनिहालों को स्कूल में सफलता के लिए कैसे तैयार करते हैं। इसके विश्लेषण के लिए इन देशों के आर्थिक आकड़ों की भी जाच की गई है।&lt;br /&gt;बच्चों के विकास के लिए चल रहे प्रयास और आर्थिक आकड़ों के विश्लेषण के बाद निकले नतीजों से यह पहचाना जा सकता है कि जिन देशों ने बच्चों के लिए निवेश किए, उन्हें मौके दिए, उन देशों में बच्चों की विकास की प्रवृत्ति दिखने लगी है।&lt;br /&gt;रिपोर्ट में उन सभी उपकरणों और संसाधनों का भी जिक्र है, जो किसी बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और शिक्षा के लिए जरूरी माहौल सुनिश्चित करते हैं। इसके साथ यह भी बताया गया है कि जिन लोगों को इनकी सबसे ज्यादा जरूरत है, उन तक वह पहुंच नहीं पाते।&lt;br /&gt;किसी भी देश में बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा और स्कूल में उनकी सफलता में देश का कल्याण निहित है। दुनिया की आर्थिक खुशहाली का राज भी इन नौनिहालों की खुशी में छुपा है। यह एक मनोवैज्ञानिक सच्चाई तो है ही, लेकिन पूरी दुनिया में इस पर जो शोध हुए हैं, उससे भी यह साबित हो गया है कि कोई भी बच्चा स्कूल में तभी सफल होता है, जब उसे सीखने के लिए बढि़या माहौल मिले।&lt;br /&gt;दुनिया में समाज की आमदनी बढ़ाने और लागत घटाने का भी यह सबसे अहम नुस्खा है। माना कि अमेरिका एक अमीर कद्दावर देश है, फिर भी वहा के बच्चे स्कूलों में बहुत अच्छा नहीं कर रहे हैं। इसकी वजह यही बताई जा रही है कि इन बच्चों को जरूरी पारिवारिक सुरक्षा नहीं मिल रही है।&lt;br /&gt;मैक्सिको, नेवादा, मिसीसिपी, एरीजोना और अलबामा यह पाच अमेरिकी राच्य बच्चों की पढ़ाई में कम दिलचस्पी के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। यहा बच्चों के विकास में अड़चन का सबसे अहम कारण अभिभावकों की भागीदारी का न होना है। उनके घर का माहौल पढ़ाई-लिखाई के माकूल नहीं है।&lt;br /&gt;अमेरिका में पढ़ाई में गिरावट 1999 के आसपास आनी शुरू हुई। 1995 तक यह देश बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में अग्रणी था। वर्ष 2000 में स्थिति बिगड़नी शुरू हुई और यह आठवें पायदान पर पहुंच गया। 2006 में यह घटकर 14वें क्रम में आ गया। वहा कालेज छोड़ने वाले बच्चों की संख्या अचानक बढ़ने लगी है।&lt;br /&gt;फिलहाल दुनिया के 24 औद्योगिक देशों के बीच शिक्षा के मामले में अमेरिका 18वें पायदान पर है। वहा के 53 फीसदी नौजवान बीच में ही कालेज की पढ़ाई छोड़ रहे हैं।&lt;br /&gt;दरअसल, विकासशील देशों में पाच वर्ष तक के 40 फीसदी बच्चे बेहद गरीबी में जी रहे हैं। उनकी सेहत का खयाल रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उन्हें भरपेट पौष्टिक भोजन भी नहीं मिल रहा है। यही वजह है कि उनकी क्षमता पूरी तरह पल्लवित नहीं हो रही है, न ही देश के विकास में उनकी भागीदारी का उपयोग हो रहा है। सेव द चिल्ड्रन के अनुसार, किसी देश के खुशहाल भविष्य की यह अहम शर्त है।&lt;br /&gt;चार्ड, बुरूंडी, अफगानिस्तान, गीनिया, बिसाऊ और माली दुनिया के ऐसे देश हैं, जहा बच्चों को ठीक-ठाक प्राथमिक शिक्षा भी नहीं मिल पा रही है। बुरूंडी में पाच वर्ष तक की उम्र के 25 फीसदी बच्चे स्कूल नहीं जाते। माली में 37 फीसदी और चार्ड में 40 फीसदी बच्चों को स्कूल का मुंह देखना नसीब नहीं हो पाता और गीनिया बिसाउ में 55 फीसदी बच्चे नहीं जानते कि पढ़ाई क्या होती है। इसकी वजह इन देशों के गरीबी है। यहा ऐसी सार्वजनिक सेवाओं का गंभीर अभाव है, जो इन बच्चों की सेहत का खयाल रख सके। समस्याओं और संघर्ष से जूझ रहे इन देशों के माहौल ने इन बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया है और इसका असर इनके जीवन पर तो पड़ ही रहा है, इससे देश का भविष्य भी चौपट होता लग रहा है।&lt;br /&gt;उधर क्यूबा, आर्मीनिया, साइप्रस, चिली और अजरबैजान ये पाच देश अपने बच्चों को बेहतर माहौल देने के लिए जाने जाते हैं। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पारिवारिक जीवन की बदौलत यहा के बच्चे स्कूलों में बढि़या पढ़ाई कर रहे हैं। 'सेव द चिल्ड्रन' ने अपनी रिपोर्ट में बच्चों के विकास में मा की अहम भूमिका का भी जिक्र किया है।&lt;br /&gt;उसका मानना है कि भविष्य में मानवता की रक्षा का सूत्र मा के हाथ में है। मा ही बच्चे की पहली शिक्षक है, जो उसे स्कूल से लेकर समाज और देश तक में अपने अस्तित्व के लिए तैयार करती है। वह उसके पहले पाच साल में उसके व्यक्तित्व में उन सारे गुणों का समावेश करती है, जो दुनिया में उसके जीवन और संघर्ष इत्यदि से जूझने के लिए जरूरी है, लेकिन सफलता का यह सूत्र अकेले ही बच्चों को आगे नहीं बढ़ा सकता। इसके लिए किसी भी देश में राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है।&lt;br /&gt;राजनीतिक इच्छाशक्तिके इस नुस्खे में मा-बच्चे की सेहत सबसे अहम पहलू है। इसकी शुरुआत गर्भ धारण के साथ ही हो जानी चाहिए। गर्भवती स्त्री को जब तक उसके स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा की गारटी न मिले, वह स्वस्थ संतान को कैसे जन्म दे पाएगी। लिहाजा, उसके लिए सभी तरह के संक्रमण से बचाव का इंतजाम बहुत जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान उसकी कठिनाइयों की भरपूर निगरानी हो और बच्चे को जन्म देने के पहले और उसके बाद जच्चा-बच्चा का ख्याल तो जरूरी है ही। बच्चों की सेहत का ख्याल पूरे घर को रखना है। लिहाजा, घर के सदस्यों को बच्चों से जुड़ी छोटी-मोटी बातों का भी पता है, यह सुनिश्चित करना राजनीतिक इच्छाशक्ति का ही हिस्सा है।&lt;br /&gt;विकासशील और औद्योगिक देशों में ऐसे बेहिसाब कार्यक्रम हैं, जो बच्चों के चौतरफा विकास के लिए जरूरी बातों का प्रशिक्षण देते हैं। वे बच्चों की देखभाल के साथ ही उन्हें बच्चों से कुकर्म और उनकी उपेक्षा जैसी बातों का मर्म बताते हैं। इन देशों में एड्स, सुनामी जैसी प्राकृतिक विपदाओं और श्रीलंका, अफगानिस्तान जैसे संघर्ष से जूझ रहे देश के बच्चों के लिए विशेष कार्यक्त्रम हैं। अमेरिका भी 'सबके लिए शिक्षा' नाम से कार्यक्रम चलाता है।&lt;br /&gt;कल्याणकारी कार्यक्रमों से बच्चों की शिक्षा निश्चित तौर पर प्रभावित होती है। दिल्ली में चल रहे एक कार्यक्रम की बदौलत संबद्ध इलाके के बच्चे पढ़ाई की तरफ प्रवृत्त हुए हैं। इन इलाकों में लड़कियों की पढ़ाई में 7.7 और लड़कों की पढ़ाई में 3.2 का इजाफा हुआ है। इसी तरह स्कूल में आगे पढ़ने वाले छात्र भी बढ़े हैं। हमारे पड़ोसी देशों में श्रीलंका को छोड़कर बाकी देशों में प्राथमिक शिक्षा का दृश्य बहुत बढि़या नहीं है। भूटान में 20 फीसदी बच्चे प्राथमिक शिक्षा नहीं लेते हैं। नेपाल में 24 फीसदी और पाकिस्तान में 34 फीसदी बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। श्रीलंका में प्राथमिक शिक्षा लेने वाले बच्चों की तादाद 90 फीसदी है। वहा सिर्फ तीन फीसदी बच्चे स्कूल नहीं जाते और एक फीसदी बच्चों के फेल होने यानी एक ही कक्षा में दोबारा पढ़ने की नौबत आती है। वहा 93 फीसदी बच्चे पाचवीं तक की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं।&lt;br /&gt;'सेव द चिल्ड्रन' की पहलकदमी से कुछ देशों ने शिक्षा में परिवार और माहौल की भागीदारी के महत्व को समझ लिया है। संगठन की छत्रछाया में पूरी दुनिया में बच्चों और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हो रही है और उसी हिसाब से शिक्षा के अवसर देने के लिए प्रयत्न चल रहे हैं। बच्चों के विकास में मा की भूमिका को रेखाकित किया जा रहा है। लिहाजा माताओं की शिक्षा और उनके स्वास्थ्य के लिए भी इंतजाम हो रहे हैं। भारत में नन्हें बच्चों की प्राथमिक शिक्षा और उसके इर्द-गिर्द के प्रयासों पर 'सेव द चिल्ड्रन' कार्यक्रम में कोई खास जिक्र नहीं मिलता, पर बिहार में कोसी के कहर के बाद बेघर हुए बच्चों के लिए उसके शिक्षा के जो प्रयास चल रहे हैं, उनकी भी अनदेखी नहीं हो सकती। बहरहाल, बच्चों के बचाव और विकास की बुनियाद पर देश के सामाजिक, आर्थिक विकास का सपना बुनने वाली यह संस्था अपने प्रयासों में असर दिखाने लगी है।&lt;br /&gt;पर पता नहीं उसे मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के स्कूलों की खबर है या नहीं। इतंजार बस यही है कि दुनिया का हर बच्चा कब भरपेट भोजन और भरपूर पढ़ाई कर पाएगा?&lt;br /&gt;इन पर करो अमल, देखो फिर असर&lt;br /&gt;अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसी 'सेव द चिल्ड्रन' के एक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष पांच साल से कम उम्र के लगभग बीस लाख बच्चों की मौत होती है। यह संख्या दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले अधिक है। पाच वर्ष से कम आयु में मृत्यु की दर को 2010 से 2015 के बीच आधा करने के लिए सेव द चिल्ड्रन मिलेनियम डेवलपमेंट गोल-4 लेकर आई है। इसके तहत संस्था ने एक सात-सूत्रीय कार्यक्त्रम पेश किया है और विशेष रूप से भारत का ध्यान इन सात क्षेत्रों की ओर आकर्षित किया है।&lt;br /&gt;भारत से कहा गया है कि वह विश्वसनीय राष्ट्रीय योजना लागू करे। इसके तहत भारत 2011 तक मां, नवजात शिशु और शिशु बचाव संबंधी विशेष योजना पर अमल शुरू कर देगा, जिस पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, महिला और शिशु उत्थान, जल और शौच, नागरिक विकास मंत्रालय और नरेगा काम करेगा-&lt;br /&gt;नवजात शिशु पर फोकस:&lt;br /&gt;पचास प्रतिशत नवजात शिशु पहले महीने के अंदर ही मौत के शिकार हो जाते हैं। इसके लिए उनके जीवित रहने के उपायों पर विशेष जोर दिए जाने की सलाह दी गई है। चूंकि भारत में दो तिहाई प्रसव घरों में होते हैं, इसलिए नवजात शिशु की जरूरी देखभाल घर के साथ-साथ अस्पताल और स्वास्थ केंद्रों में उपलब्ध कराई जाए।&lt;br /&gt;नवजात की देख रेख:&lt;br /&gt;इसे प्राथमिकता दी जाए। इसमें मां, नवजात बच्चे के स्वास्थ, पोषण और अन्य संबंधित चीजों के बीच की दूरी को कम किया जाना शामिल है। इसके अलावा अमीर और गरीब विशेषरूप से अधिकारहीन वर्ग के बच्चों की मृत्यु दर के बीच की दूरी को कम करना भी शामिल है। अतिरिक्त संसाधन जुटाना: भारत को चाहिए कि 2015 तक स्वास्थ पर खर्च की जाने वाली जीडीपी की एक प्रतिशत रकम को बढ़ा कर पाच प्रतिशत करे, जो अंतरराष्ट्रीय औसत है। बच्चे के स्वास्थ्य, पोषण, पीने के पानी, स्वास्थ, विद्या, आजीविका और खाद्य सुरक्षा स्कीमों पर ख़र्च की जाने वीली रकम को दोगुना करे।&lt;br /&gt;स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों को प्रशिक्षण-अतिरिक्त दिए गए पैसों में से कुछ हिस्सा हेल्थकेयर कर्मचारियों की भर्ती, प्रशिक्षण, उन्हें सामान देने और तैनात करने में खर्च किया जाए। भारत में प्रशिक्षित और उपकणों से लैस हेल्थकेयर कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि का लक्ष्य बनाया जाए। विशेष तौर पर सबसे ज्यादा गरीब और अधिकारहीन वर्गो की जरूरतों को पूरा करने के लिए।&lt;br /&gt;कुपोषण पर काबू करें:&lt;br /&gt;पोषण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पुष्टिकर अनुपूरक, विशेष स्तनपान कराने, पूरक खुराक और खाद्य किलाबंदी के साथ-साथ प्रमाणित बचाव के उपायों को अपनाया जाए। इसके अलावा कैश ट्रांसफर और सामाजिक सुरक्षा के कार्यक्रमों को सहायता प्रदान की जानी चाहिए।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-1753675876190754590?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/1753675876190754590/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_1291.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/1753675876190754590'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/1753675876190754590'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_1291.html' title='भरपेट भोजन व शिक्षा के मोहताज बच्चे'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-7843004251021351658</id><published>2009-10-12T07:25:00.000-07:00</published><updated>2009-10-12T07:32:50.134-07:00</updated><title type='text'>अजीब मगर सच?</title><content type='html'>सूचना क्रांति के इस दौर में एक व्यक्ति ऐसा भी है जिसने खुद को एक कमरे में बंद कर रखा है और पिछले 47 साल से वह बाहर नहीं निकला है। बाहरी दुनिया से उसका कोई संपर्क नहीं है।&lt;br /&gt;चीन के साथ युद्ध, मां की मौत और भाई का विवाह किसी भी मौके पर थूला बोरा कमरे से बाहर नहीं निकला। असम के सोनितपुर जिले में तेजपुर के समीप देउरी गांव में रह रहे 63 वर्षीय बोरा को उस समय भी अपने कमरे से बाहर निकलने की जरूरत महसूस नहीं हुई जब चीन के हमले के बाद शत्रु की सेनाएं इलाके को लगभग घेर चुकी थीं और लोगों को वहां से निकाला जा रहा था।&lt;br /&gt;बताया जाता है कि 1962 में बोरा मैट्रिक की परीक्षा में फेल हो गया। मां की डांट उसे सहन नहीं हुई और 16 वर्षीय यह युवक एकान्तवासी हो गया। मां की मौत और भाई के विवाह पर भी वह कमरे से नहीं निकला।&lt;br /&gt;एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सत्यन गोस्वामी ने बताया कि मैंने कई बार बोरा को बाहर निकलने के लिए समझाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं निकला। अपने एकांतवास का उसने कोई कारण भी नहीं बताया।&lt;br /&gt;बोरा के परिजन भी बताते हैं कि पिछले 47 साल में वह एक बार भी अपने कमरे से बाहर नहीं निकला। बोरा के परिजनों के अनुसार, उसे भोजन अंदर दे दिया जाता है जिसे वह मर्जी के अनुसार, खा लेता है। अपने कमरे की सफाई बोरा खुद करता है।&lt;br /&gt;पहले वह देशभक्तिपूर्ण कविताएं लिखता था और कभी कभार उन्हें पढ़ता भी था लेकिन समय के साथ यह शौक खत्म हो गया।&lt;br /&gt;उसके एक परिजन ने बताया कि अब वह कमजोर हो गया है। उसकी यादाश्त भी पहले जैसी नहीं है। हम सभी को तो वह पहचान भी नहीं पाता। जब बोरा ने स्वयं को एक कमरे में कैद किया था तब उसकी उम्र 16 साल थी। आज वह 63 साल का है। इस बीच उसने कभी किसी के साथ बुरा सलूक नहीं किया।&lt;br /&gt;उसके भाई ने बताया कि संपर्क करने पर डाक्टरों ने कहा कि शायद बोरा अवसाद का शिकार है लेकिन खुद बोरा ने कभी डाक्टरी जांच नहीं कराई।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-7843004251021351658?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/7843004251021351658/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_12.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7843004251021351658'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7843004251021351658'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post_12.html' title='अजीब मगर सच?'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-58783102379263607</id><published>2009-10-10T08:26:00.000-07:00</published><updated>2009-10-10T08:27:54.563-07:00</updated><title type='text'>लोगों के दिल में आज भी धड़कते हैं जेपी</title><content type='html'>भ्रष्टाचार और सत्ता की तानाशाही के खिलाफ लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने सन 1974 में संपूर्ण क्रांति का बिगुल बजाया था। क्रांति के उनके इस आह्वान से पूरा बिहार आंदोलित हो उठा था। आज भी जेपी आंदोलन की यादें लोगों के दिलो-दिमाग में रची-बसी हैं। नौजवानों ने इसमें खास भूमिका निभाई थी। लेकिन लोगों को इस बात का मलाल है कि आंदोलन के बाद सरकार तो बदली, लेकिन व्यवस्था आज भी नहीं ज्यों की त्यों है। जबकि लालू यादव व नीतीश कुमार सरीखे सूबे के कद्दावर नेता कभी जेपी आंदोलन के ही सिपाही रहे हैं।&lt;br /&gt;जेपी आंदोलन के एक सिपाही रहे पश्चिमी चंपारण के ठाकुर प्रसाद त्यागी के लिए जेपी आज भी आदर्श हैं। रामपुकार मिश्र कहते हैं 'जेपी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नई पीढ़ी को उनकी जीवनी पढ़ाई जानी चाहिए।' अजय सुहाग की माने तो जेपी ने जिस छात्र युवा संघर्ष वाहिनी की नींव रखी, वह आज सिर्फ बेतिया में कायम है। बगहा के अखिलेश्वर पांडेय, सुधाकर तिवारी व उमेश उपाध्याय ने भी आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी। अखिलेश्वर पांडेय व सुधाकर तिवारी के मुताबिक वे लोग नरकटियागंज टीपी वर्मा कालेज के छात्र थे। क्रांतिकारी भाषणों से प्रेरित होकर दोनों आंदोलन में कूद पड़े। जेपी के आह्वान पर वे विधानसभा की कार्रवाई बंद कराने पटना भी पहुंचे। गिरफ्तारी हुई। उन्हें भागलपुर सेंट्रल जेल भेजा गया। 350 लोगों के साथ एक माह 5 दिन बंद रहे।&lt;br /&gt;उमेश उपाध्याय कहते हैं कि वे एमजेके कालेज में अध्ययनरत थे। इंटर की परीक्षा शुरू होने वाली थी। जेपी के आह्वान पर छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार किया। प्रदर्शन के दौरान उन्हें बेतिया कारागार में डाल दिया गया। बकौल, उमेश तिवारी जेपी का सपना अधूरा है। मुजफ्फरपुर में जेपी के विचारों को शिद्दत से जीने वाले शशिकांत झा स्वीकार करते हैं कि आंदोलन से वे इतने गहरे से जुड़ गए थे कि उन्होंने पश्चिमी चंपारण के नवल उच्च विद्यालय की हेडमास्टरी छोड़ दी। आपातकाल में जेल भी जाना पड़ा।&lt;br /&gt;वाजपेयी भी बंद थे मोतिहारी जेल में&lt;br /&gt;चंपारण की मिंट्टी में क्रांति की तासीर है। चाहे अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ बापू का सत्याग्रह हो या लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेपी की संपूर्ण क्रांति। चंपारण की धरती ने ही उसे ऊर्जा प्रदान की। जेपी आंदोलन के दौरान यहां के छात्र- नौजवान हजारों की संख्या में 'बिहार भी गुजरात बनेगा, चंपारण ही शुरुआत करेगा' के गगनभेदी नारों के साथ सड़कों पर उतरकर जेल भर रहे थे। जोश इतना कि यहां की जेल भी छोटी पड़ने लगी। जेल गए नेताओं से मिलने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी यहां आए थे। जब उन्हें मुलाकात की अनुमति नहीं मिली तो वे डीएम आवास के सामने धरना पर बैठ गए। स्थिति की भयावहता को भांपकर तत्कालीन डीएम विनय कुमार सिंह ने जनसंघ के जिलाध्यक्ष व पूर्व विधायक राय हरिशंकर शर्मा को तुरंत रिहा कर दिया। इस पर वाजपेयी ने गुनगुनाया था-'मैंने कैद मांगी थी, रिहाई तो नहीं मांगी..।' बस, इतनी सी बात से चिढ़कर प्रशासन ने शर्मा के साथ अटल बिहारी वाजपेयी व कैलाशपति मिश्र को भी जेल में डाल दिया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-58783102379263607?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/58783102379263607/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post.html#comment-form' title='13 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/58783102379263607'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/58783102379263607'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/blog-post.html' title='लोगों के दिल में आज भी धड़कते हैं जेपी'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>13</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-1116787428688656027</id><published>2009-10-09T07:19:00.000-07:00</published><updated>2009-10-09T07:52:03.034-07:00</updated><title type='text'>मदरसा board</title><content type='html'>हिंदुस्तान में मरकजी मदरसा बोर्ड बनने की बात सरकार ज़ोर व शोर से कर रही है-मगर मज़हबी उलमा  और मिल्ली तंजीमें सरकार के इस फासले की शदीद मोखालेफत कर रहे है-उनका कहना है के सरकार इस  चोर दरवाज़े से दिनी मदरसों में दाखिल होने की कोशिश कर रही है-यही वजह है के सिर्फ़ ४ फीसद मदरसों के तलबा के लिए  iस कदर &lt;span class=""&gt;परेशान &lt;span class=""&gt;हे-m&lt;/span&gt;u&lt;/span&gt;स्लिम ऍम पि  भी उलमा की इस राइ से मुत्तफिक  &lt;span class=""&gt;है-u&lt;/span&gt;नका कहना है के सरकार अगर वाकई मुस्लिम बचों के लिए कुछ कर न चाहती है तो उसे फले ९६ फीसद उन बचों के लिए करे जो स्कूल में  पड़ते है -यही राइ  करीब सबी मुसलमानों की है-वो दिनी मदरसों में सरकार की मुदाख्लत कभी नही चाहे गी -मुसलमानों का यह शभा बिल्कुल दुरुस्त है के सरकार के इस क़दम से मदरसों का नुकसान होगा -गोर करने की बात यह भी है के सरकार पहले ९६ फीसद उन मुस्लिम बचों के लिय किया क्र रही है-अज मुसलमान अपने ही मुल्क में इतना पीछे किउन है -अगर सरकार मुसलमानों पर ईमानदारी से तवजो देती तो आज मुसलमनो की यह हालत न होती -सेंतारल एजुकाशन  बोर्ड के बन्ने से एक बड़ा नोकसान ये है के बोर्ड के मदरसों में तलबा पर धेयाँ कम दया जाता है -ढंग से तरबियत भी नही की जाती है-यही वजा है के मदरसों की असल रूह ख़तम होजाती है-बोर्ड के मदरसों में न तो तालीम होती है न तरबियत सिर्फ़ बोर्ड ही बोर्ड होता है-&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-1116787428688656027?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/1116787428688656027/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/board.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/1116787428688656027'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/1116787428688656027'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/10/board.html' title='मदरसा board'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-7008334583893404166</id><published>2009-07-05T07:56:00.000-07:00</published><updated>2009-07-05T08:03:43.551-07:00</updated><title type='text'>tumhe maine paliya</title><content type='html'>tere sath hun,tere sath tha.tere hath men mera hath tha.&lt;br /&gt;tere sath rah ke bhi kiun ye laga&lt;br /&gt;tujhe mai ne paya abhi abhi&lt;br /&gt;badi door tak badi der tak&lt;br /&gt;tere sath mera safar raha&lt;br /&gt;tera hath mere hath men&lt;br /&gt;mai chala to tu mere sath tha&lt;br /&gt;mai ruka to tu mere sath hai&lt;br /&gt;tu abhiabhi mere sath hai&lt;br /&gt;mere  hath men tera hath hai&lt;br /&gt;Magar aisa hota hai guman kun&lt;br /&gt;Tujhe mai ne paya kabhi kabhi&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-7008334583893404166?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/7008334583893404166/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/07/tumhe-maine-paliya.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7008334583893404166'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/7008334583893404166'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/07/tumhe-maine-paliya.html' title='tumhe maine paliya'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-3656835755186514899</id><published>2009-07-02T08:42:00.000-07:00</published><updated>2009-07-02T08:51:44.256-07:00</updated><title type='text'>Gay sex  samaj par hamla</title><content type='html'>Gay sex (hamjinsi )pure hindustani samaj par hamla hai.esliye ki har mazhab aour dhram men gunah hai.es burahi me shami hone ki wajah se bahut si qoum par khuda ka Azab achuka hai.Gay sex samaj ke liye khatar nak bimari se kam nahi hai.qanooni tour par sahi qrar dena durust nahi ha.yeh westran samaj ka hissa hai.khuda hamari hifazat kare.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-3656835755186514899?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/3656835755186514899/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/07/gay-sex-samaj-par-hamla.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/3656835755186514899'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/3656835755186514899'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/07/gay-sex-samaj-par-hamla.html' title='Gay sex  samaj par hamla'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2464529291138990090.post-5881624146486018307</id><published>2009-06-18T07:59:00.000-07:00</published><updated>2009-10-26T07:42:24.196-07:00</updated><title type='text'>AMU branch at kishan ganj</title><content type='html'>&lt;div&gt;Assalamu Alaikum&lt;br /&gt;Thank you so much for your response.&lt;br /&gt;Keep the good work going. Don't mind the protests form 1 quarter or another. As the steps I have suggested you, will serve several purposes. While it will keep the follow-up active and going at the same time, the responses received from the representatives (MP, MLAs) will put them on the path of commitment for the cause. Afterwards, they will be accountable and can not indulge themselves into blame game politics. The present representatives have to make sure that they make all efforts in their disposal to keep the projects going already approved / started by their predecessors (irrespective of their political affiliation) and bring forward new projects.&lt;br /&gt; Politics has always been a dual edge weapon. It all depends on us how we take advantage of the situation. Politics is not about manipulations which are generally seen. It is all about strategy where with all the conflicting situations and hurdles, you achieve your goal. This is what our representatives need to demonstrate. Whatever response you get from the representatives/ Govt of Bihar, try to get it published in the news paper. In this way their responses will become part of public record. For this purpose you can take help of our brothers in the media profession. &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2464529291138990090-5881624146486018307?l=shahab-e-saqib.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/feeds/5881624146486018307/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/06/amu-branch-at-kishan-ganj.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/5881624146486018307'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2464529291138990090/posts/default/5881624146486018307'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://shahab-e-saqib.blogspot.com/2009/06/amu-branch-at-kishan-ganj.html' title='AMU branch at kishan ganj'/><author><name>khushi</name><uri>http://www.blogger.com/profile/08124070134775816360</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4y5h6_jruAg/Sjo7dPuuiLI/AAAAAAAAAAM/PLydg1O3Rko/S220/shahabuddin.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry></feed>
