पिछले हफ्ते बटला हाउस iन्कोन्टर की तीसरी बरसी के मो कि पर यकलख्त (एकदम) मुझे ऐसा महसूस हुआ कि 18 / सितम्बर 2008 / को जामिया नगर में पुलिस उत्पीड़न का शिकार बने आतिफ और साजिद का लहू बोलने लगा है. क्योंकि उस दिन एक तरफ जहां विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक रहनमा ऑ, छात्रों समुदाय की ओर से विरोध और धरने का आयोजन, कर करके सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा जांच की मांग को दोहराते न्याय की गोहार लगाई जा रही थी वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र पुलिस हिंदू आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए राज्य सरकार से सिफारिश कर रही थी. महाराष्ट्र पुलिस ने सरकार से भगवा संगठन सनातन संस्था और अभिनव भारत को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन की सूची में शामिल किए जाने की पुरजोर सिफारिश की तो केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार से इन संगठनों गतिविधियों की अधिक जानकारी मांगी। यह सब अचानक नहीं हो गया, इसके लिए वर्षों से को शशें हो रही थी, सरकार को लगातार जगाया जा रहा था, पुलिस और प्रशासन को भगवा आतंकवादियों की ओर गंभीरता से ध्यान आकर्षित करने आवेदन की जाती रही हैं यही वजह है कि देर से ही सही सरकार और प्रशासन न...
khidmat e khalq trust india ki janib se Muzaffarpur ke Aurai block ke alag alag agon me ja gar majboor w besahara logon me Blanket (kambal)bante huye Aurai tahana ke daroga babu shree Ravindra kumar yadav ji aur trust ke digar karkunan-sabhi hazrat ka behasd shukriya-
भ्रष्टाचार और सत्ता की तानाशाही के खिलाफ लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने सन 1974 में संपूर्ण क्रांति का बिगुल बजाया था। क्रांति के उनके इस आह्वान से पूरा बिहार आंदोलित हो उठा था। आज भी जेपी आंदोलन की यादें लोगों के दिलो-दिमाग में रची-बसी हैं। नौजवानों ने इसमें खास भूमिका निभाई थी। लेकिन लोगों को इस बात का मलाल है कि आंदोलन के बाद सरकार तो बदली, लेकिन व्यवस्था आज भी नहीं ज्यों की त्यों है। जबकि लालू यादव व नीतीश कुमार सरीखे सूबे के कद्दावर नेता कभी जेपी आंदोलन के ही सिपाही रहे हैं। जेपी आंदोलन के एक सिपाही रहे पश्चिमी चंपारण के ठाकुर प्रसाद त्यागी के लिए जेपी आज भी आदर्श हैं। रामपुकार मिश्र कहते हैं 'जेपी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नई पीढ़ी को उनकी जीवनी पढ़ाई जानी चाहिए।' अजय सुहाग की माने तो जेपी ने जिस छात्र युवा संघर्ष वाहिनी की नींव रखी, वह आज सिर्फ बेतिया में कायम है। बगहा के अखिलेश्वर पांडेय, सुधाकर तिवारी व उमेश उपाध्याय ने भी आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी। अखिलेश्वर पांडेय व सुधाकर तिवारी के मुताबिक वे लोग नरकटियागंज टीपी वर्मा कालेज के छात्र थे। क्रांतिकारी भाषणों से प...
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