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Showing posts from January, 2014

سیکورٹی ایجنسیوں کے منھ پر کیجریوال کا طمانچہ

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 عربوں میں  ایک کہاوت بہت مشہور ہے کہ عوام حکمرانوںکو دیکھتے ہیں اور ان کی پیروی کرتے ہیں، اگر حکمران اچھے ہوں گے، سلاطین بہتر ہوں گے تو اس کا اثر رعایا پر بھی ہوگا، وہ بھی اپنے آپ کو بہتر کریں گے اور اگر حکمرانوں کی اخلاقی حالت خراب ہوگی تو رعایا  کی اخلاقی حالت بھی گری ہوئی ہوگی۔ ہندوستان میں شاید پہلی بار ایسا ہوا ہے کہ دیش کے کسی  وزیر اعلیٰ نے اپنی سیکورٹی کے حوالے سے انڈین مجاہدین کے نام پر سخت برہمی کا اظہار کیا ہو اور اپنے اغوا کی پولیس اور خفیہ ایجنسی کی ان پٹ کو بکواس  و سیاسی قراردیا ہو۔دہلی کے وزیر اعلیٰ اروند کیجریوال نے اپنے تحفظ کے تعلق سے ان مسلم قائدین کو بھی پیچھے چھوڑدیا ہے جنہیں انتہا پسند تنظیموں کےمبینہ ممکنہ حملوں کے پیش نظر حکومت کی طرف سےزیڈ پلس سیکورٹی فراہم کی جاتی ہے۔جہاں تک ملک کی سالمیت اور انتہا پسندوں کی طرف سےاعلیٰ رہنماؤوں  کی جان کودرپیش خطرات کا سوال ہے تو اس سلسلے میں آئی بی نے کوئی پہلی بار’ یہ تیر‘ نہیں ماراہے اس سے قبل کئی بار کبھی گجرات کے وزیر اعلیٰ نریندر مودی  تو کبھی بی جے پی کے سینئر لیڈر ایل کے اڈوانی اور دوسرے زعفرانی نتیاؤں  کے

ठण्ड से मरती प्रजा और डांस का मज़ा लेता राजा

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ठण्ड से मरती प्रजा और डांस का मज़ा लेता राजा मंगलवार, 31 दिसम्बर, 2013   शहाबूद्दीन साक़िब     यह सब भारत जैसे देश में मुस्लिम के लिए ही सम्भव है।  जिस नेता की यह ज़िम्मेदारी है कि  वह अपनी जनता की रक्षा करे पहले तो वह उन्हें मरवाता है और फिर जब यह जनता राहत कैम्प में जानवरों जैसी ज़िन्दगी गुज़ारती है तो यही नेता उन्हें वहाँ हर प्रकार की सहूलत देने के  बजाये न उन्हें वहाँ से ज़बरदाती निकलवाता है बल्कि ठंड  से मरती  जनता और ठण्ड से मरते बच्चों की मौत पर अफ़सोस करने के बजाये बजाये अर्धनंग हीरोइनों के डांस देखता है।  जी हाँ वह मुलायम जिन्हें मुल्ला मुलायम कहा जाता है उन्हों ने  दिखा दिया है कि मुसलमानों से नफरत के मामले में वह भी किसी दुसरे कट्टर नेताओं से कम नहीं हैं।  यह सच है कि नेताओं की ज़बान  जब चलने लगती है तो  सारी हदों  को पार कर जाती है और उस पर लगाम लगाना आसान  नहीं होता , खैर से मामला कुर्सी हासिल कंर ने का होता तो यह लोग अपनी शराफत को भी ताक पर रख देते है , देश की इज्जत जनता के अहसान , अपनी ज़िम्मेदारी और  पद का एहसास तो दूर की बात है . हिंदुस्तान म

भाजपा इसलिए करती है साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक का विरोध

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�भाजपा इसलिए करती है साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक का विरोध मंगलवार, 10 दिसम्बर, 2013   शहाबूद्दीन साक़िब     यह कहावत बड़ी पुरानी है कि ' चोर की दाढ़ी में तिनका ' . कहा जाता है कि सदियों पहले जब किसी पर चोरी का आरोप लगाया जाता  था और वह शख्स  इस आरोप से इनकार करता  है तो उसके कानों में एक शब्द  डाल जाता था ' चोर की दाढ़ी में तिनका ' और फिर वह शख्स खुद को सबकी नजरों से बचाते हुए बार बार अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए यह अनुमान लगाने की कोशिश करता  कि वास्तव में तिनका तो नहीं निकल आया और यही अंदाज उसे चोर साबित करने की दलील बन जाता था . पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपने कट्टरपंथी रुख को  दोहराते हुए कहा कि वह संसद में 'साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक (Prevention of Communal and Targeted Violence )  का विरोध करेगी . जब कभी सरकार ने इस बिल को लेकर मामूली सा भी संकेत दिया है , भाजपा के नेता बरसाती मेंढक की तरह  विरोध में एक साथ टर्टराने लगे हैं , क्योंकि उन्हें इस बात का बखूबी अंदाजा है कि सांप्रदायिक हिं